
अमेरिका का मुनीर प्रेम: हाइपरसोनिक मिसाइलों के साये में नोबेल का सपना देख रहे डोनाल्ड ट्रंप
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ये ट्रंप का समय हैं. हर देश, कहीं न कहीं, ट्रंप की नोबेल की भूख को तुष्ट करने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से एक मोहरा बन चुका है. युद्ध ट्रंप के लिए अवसर हैं, और दुनिया के देश उन्हें अगला नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने में मदद करने के लिए आपस में लड़ रहे हैं.
बीती रात कुछ ईरानी सोशल मीडिया अकाउंट्स से यह दावा किया गया कि "दुनिया को एक ऐसा सरप्राइज मिलने वाला है जिसे वह कभी नहीं भूलेगी." इसके कुछ ही देर बाद, तेल अवीव के आसमान में मिसाइलों के इंटरसेप्शन का नया फुटेज सामने आlता है और फिर एक हाइपरसोनिक मिसाइल आयरन डोम को चीरते हुए बिजली की रफ्तार से ज़मीन पर गिरती है. थोड़ी देर में आग के गोले के साथ धमाके की आवाज़ आती है. ये नजारा किसी को सुकून देता है तो किसी को खौफ.
मुझे याद है जब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जम्मू में ड्रोन मंडरा रहे थे, तब मेरे एक दोस्त, जिसके मां-बाप सैनिक कॉलोनी में रहते थे, ने अपने माता-पिता को फ़ोन करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो सका. वह बेसुध हो गई थीं.
ठीक इसी तरह तेल अवीव के उन लोगों के बारे में सोचिए जिनके अपार्टमेंट पर हाइपरसोनिक मिसाइल आयरन डोम को चीरते हुए गिरी. इसके बाद भले ही इजरायल ने ईरान में बमबारी की हो लेकिन मिसाइल के गिरने का खौफ इन लोगों के दिल से शायद ही निकल पाएगा.
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युद्ध अब सोशल मीडिया तक सीमित नहीं
सोशल मीडिया के इस दौर में यह भी साफ हो गया है कि अब जंगें सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहीं हैं. ड्रॉइंग रूम में बैठकर लोग मज़ाक भी कर रहे हैं और रणनीति भी समझ रहे हैं. जब तक आप किसी युद्धरत देश की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल की रेंज से बाहर हैं, तब तक आप उस पर मज़ाक भी बना सकते हैं और अपना मनपसंद खाना भी ऑर्डर करवा सकते हैं.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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