
'अब मुल्क में चलेगा सिर्फ अल्लाह का कानून', बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात के नेता का ऐलान
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बांग्लादेश में चुनावों से पहले जमात-ए-इस्लामी एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई है. पार्टी के सेंट्रल नायब-ए-अमीर प्रोफेसर मुजीबुर रहमान ने राजशाही की एक चुनावी सभा में कहा कि आजादी के बाद देश में अल्लाह का कानून लागू नहीं हुआ, लेकिन अब अगली संसद कुरान और सुन्नत पर आधारित अल्लाह के कानून से चलेगी और इंसानों द्वारा बनाया गया कोई कानून नहीं माना जाएगा.
बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले जमात-ए-इस्लामी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या शेख हसीना के बाद के चुनावों से पहले जमात-ए-इस्लामी अपनी पुरानी विचारधारा की ओर लौट रही है.
गुरुवार, 5 फरवरी को राजशाही में आयोजित एक चुनावी जनसभा के दौरान जमात-ए-इस्लामी के सेंट्रल नायब-ए-अमीर प्रोफेसर मुजीबुर रहमान ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने पद्मा नदी के किनारे स्थित मदरसा मैदान में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद से अब तक बांग्लादेश में अल्लाह का कानून लागू नहीं हुआ है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा.
'इंसानों द्वारा बनाया गया कोई कानून नहीं चलेगा'
राजशाही से चुनाव लड़ रहे प्रोफेसर मुजीबुर रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि भविष्य में देश में इंसानों द्वारा बनाया गया कोई कानून नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि अगली संसद 'कुरान और सुन्नत पर आधारित उस कानून के अनुसार चलाई जाएगी, जिसे अल्लाह ने बनाया है'. उनके इस बयान को जमात-ए-इस्लामी की मूल सोच की खुली अभिव्यक्ति के तौर पर देखा जा रहा है.
'अल्लाह का कानून लागू करना है तो...'
सभा के दौरान उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि अगर देश में अल्लाह का कानून लागू करना है, तो जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को वोट देना होगा. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या जमात-ए-इस्लामी चुनाव से पहले अपनी विचारधारा को फिर से उसी रूप में सामने ला रही है, जैसी वह पहले हुआ करती थी.

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