
अनिल रेलिया के संग्रह से नाथद्वारा पेंटिंग्स: श्रीनाथजी का मुख्य द्वार
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श्रीनाथजी श्रीकृष्ण भगवान के सात वर्ष की अवस्था का रूप हैं. श्रीनाथजी की लोकप्रियता के कारण राजस्थान की अरावली पहाड़ियों में बसे नाथद्वारा शहर को 'श्रीनाथजी' के नाम से जाना जाता है.
मान्यता है कि कण-कण में भगवान बसे हैं. इसी विश्वास के साथ भक्तगण विभिन्न क्षेत्रों में अपने इष्टदेव की पूजा करते हैं. भगवान कृष्ण की बात करें, तो उनके अन्य स्वरूपों के साथ-साथ उनका बाल स्वरूप भी पूज्य है. बाल कृष्ण ने ही गोवर्धन पर्वत को धारण किया था. श्रीनाथजी श्रीकृष्ण भगवान के सात वर्ष की अवस्था का रूप हैं. श्रीनाथजी की लोकप्रियता के कारण राजस्थान की अरावली पहाड़ियों में बसे नाथद्वारा शहर को 'श्रीनाथजी' के नाम से जाना जाता है. इस तरह एक जीवंत, रंगीन और शानदार चित्रों की लंबी श्रृंखला बनाने की शुरुआत हुई, जिनकी संख्या कई सदियों में असंख्य हो गई. नाथद्वारा के कुछ चुनिंदा चित्रों को कला संग्रहकर्ता अनिल रेलिया ने अपने कैटलॉग में बखूबी सहेजा है. लेखक कल्याण कृष्ण और के तलवार ने हर एक चित्र एवं उसके काल के बारे में विस्तार से एक पुस्तक 'नाथद्वारा पेंटिंग्स फ्रॉम द अनिल रेलिया कलेक्शनः द पोर्टल टू श्रीनाथजी' में लिखा है. इसे नियोगी बुक्स ने प्रकाशित किया है. नाथद्वारा चित्रों का यह जिस बारीकी, सुंदरता और सावधानीपूर्वक प्रमाणित किया गया संग्रह है, वह अपने-आप में अद्भुत है. इसमें कृष्ण की सेवा में डूबे विभिन्न कलाकारों की व्यापक प्रतिभा को चित्रित एवं प्रदर्शित किया गया है. लेखक बताते हैं कि कैसे वहां जांगिड़ और आदि गौड़ जातियों के सैकड़ों कलाकारों ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए प्रतीक चिह्न बनाने में मदद की. कृष्ण के कारनामों को दर्शाने वाले ये कलाकार कथा वाचक बन गए, जिन्होंने चित्रों के माध्यम से कृष्ण जीवन की तमाम झाकियां प्रस्तुत कीं. मंदिर के इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाओं, त्योहारों और इन कार्यक्रमों में भाग लेने वाले प्रमुख व्यक्तियों को नाथद्वारा के कलाकारों के कार्यों में दर्ज़ किया गया है. लेखक कल्याण कृष्ण और के तलवार ने ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के रूप में चित्रों का विश्लेषण किया है. पुस्तक के आरंभ में नाथद्वारा और वल्लभ संप्रदाय के इतिहास का वर्णन है. उन्होंने विशेष समारोहों के समकालीन लिखित दस्तावेज़ों के माध्यम से छानबीन कर मंदिर के अनुष्ठानों के इन चित्रित रिकॉर्ड को दर्शाया है और सावधानीपूर्वक पुरोहित वंशावली का अध्ययन किया है.More Related News

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