
'अकल्पनीय, लेकिन ज़रूरी...', भारत के साथ सभी ट्रेड बैरियर्स हटाना चाहते हैं ट्रंप
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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फाइनेंशियल एक्ज़ीक्यूटिव हॉवर्ड लुटनिक से कहा था कि वे भारत और पाकिस्तान को उनका मैसेज दें. इस संदेश में दोनों देशों को चेताया गया कि अगर वे जंग जारी रखते हैं, तो अमेरिका उनके साथ सभी व्यापारिक समझौतों को समाप्त कर देगा. इस चेतावनी के बाद दोनों देशों ने संपर्क किया और लड़ाई रोक दी.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत के साथ ऐसा व्यापार समझौता करना चाहते हैं, जिसमें सभी ट्रेड बैरियर्स पूरी तरह से हटाए जाएं. उन्होंने इसे अकल्पनीय बताया लेकिन यह भी कहा कि ऐसा समझौता भारत के साथ होना ज़रूरी है, जिससे अमेरिका भारत में बिना किसी रोकटोक के व्यापार कर सके.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अभी भारत में व्यापार करना बहुत मुश्किल है. आप वहां जाना तो दूर, जाने की सोच भी नहीं सकते, लेकिन हम एक ऐसा समझौता चाहते हैं, जिससे सभी व्यापारिक रुकावटें हट जाएं.
ट्रंप ने ये बयान 9 जुलाई की टैरिफ डेडलाइन से पहले दिया है, दरअसल, ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariffs) लागू करने की योजना बना रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह तारीख पक्की नहीं है और अमेरिका इस पर जो चाहे, वह कर सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं अगले कुछ दिनों में कई देशों को एक चिट्ठी भेजने वाला हूं, जिसमें लिखा होगा कि वे अमेरिका को कितना टैरिफ चुकाएंगे. हम तारीख को घटा-बढ़ा सकते हैं. अगर मेरी मर्जी हो, तो मैं अभी सबको चिट्ठी भेज दूं और कहूं कि बधाई हो, अब आपको 25% टैरिफ देना होगा.
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध ट्रंप के इन बयानों के बीच यह सामने आया है कि भारत और अमेरिका के बीच कई व्यापार वार्ताएं अटकी हुई हैं. दोनों देशों में स्टील, ऑटो पार्ट्स और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है. भारत चाहता है कि अमेरिका 26% टैरिफ प्रस्ताव वापस ले, जो 9 जुलाई से लागू होने वाला है. इसके अलावा भारत स्टील और ऑटो पार्ट्स पर पहले से लागू अमेरिकी शुल्कों में भी छूट चाहता है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारत ने अमेरिका को बादाम, पिस्ता और अखरोट पर शुल्क घटाने का प्रस्ताव दिया है, और ऊर्जा, रक्षा और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में अमेरिकी उत्पादों को प्राथमिकता देने का संकेत भी दिया है. हालांकि अमेरिकी वार्ताकार अभी इन प्रस्तावों पर राज़ी नहीं हुए हैं.
लंबी साझेदारी पर भारत का भरोसा इस गतिरोध के बावजूद भारत ने अमेरिका के साथ लंबी साझेदारी की प्रतिबद्धता जताई है. भारतीय अधिकारियों ने कहा कि भारत अपनी नीति स्वायत्तता बनाए रखते हुए, अमेरिका को एक भरोसेमंद आर्थिक भागीदार मानता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फरवरी में एक समझौता हुआ था, जिसमें तय किया गया था कि 2025 के शरद ऋतु तक एक प्रारंभिक व्यापार समझौता पूरा कर लिया जाएगा और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाया जाएगा. यह व्यापार 2024 में करीब 191 अरब डॉलर का था.

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