
US कैबिनेट के लिए ट्रंप की VVIP पसंद, अमेरिकी सरकार में शामिल हुए एलॉन मस्क और भारतवंशी विवेक रामास्वामी!
AajTak
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये दोनों बेहतरीन शख्स मिलकर मेरी सरकार में नौकरशाही को खत्म करने, बेफिजूल खर्च में कटौती करने, गैरजरूरी नियमों को खत्म करने और संघीय एजेंसियों के रिस्ट्रक्चर पर काम करेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप अगले साल 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. लेकिन इससे पहले वह अपनी टीम का गठन करने में जुटे हैं. कई बड़े पदों पर नियुक्तियों के बाद उन्होंने एलॉन मस्क और विवेक रामास्वामी को बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
एलॉन मस्क और विवेक रामास्वामी को डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशियंसी (DoGE) विभाग की अगुवाई करेंगे. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.
ट्रंप ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ग्रेट एलॉन मस्क अमेरिकी देशभक्त विवेक रामास्वामी के साथ मिलकर डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशियंसी की अगुवाई करेंगे, जो सेव अमेरिका मूवमेंट के लिए जरूरी है. दोनों बेहतरीन शख्स मिलकर मेरी सरकार में नौकरशाही को खत्म करने, बेफिजूल खर्च में कटौती करने, गैरजरूरी नियमों को खत्म करने और संघीय एजेंसियों के रिस्ट्रक्चर पर काम करेंगे. यह संभवत: हमारे समय का द मैनहट्टन प्रोजेक्ट बन सकता है. रिपब्लिकन नेताओं ने लंबे समय से DOGE के उद्देश्यों को पूरा करने का सपना देखा है.
मैनहटन प्रोजेक्ट दरअसल अमेरिकी सरकार का वो प्रोजेक्ट था, जिसके तहत अमेरिका ने परमाणु बम तैयार किया था.
मस्क ने अमेरिकी कैबिनेट में शामिल किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशियंसी. उन्होंने कहा कि इससे सरकारी पैसे की बर्बादी करने वाले लोगों को सीधा मैसेज जाएगा.
वहीं, विवेक रामास्वामी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एलॉन मस्क हम इसे हल्के में नहीं लेंगे बल्कि गंभीरता से काम करेंगे.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.






