
United States में भारतीय स्टूडेंट्स से लूटपाट, विरोध करने पर ताबड़तोड़ फायरिंग, एक की मौत
AajTak
अमेरिका में भारतीय छात्र लूटपाट और फायरिंग का शिकार हुए हैं. हमलावरों ने तीन छात्रों को निशाना बनाया है. इसमें से एक की मौत हो गई है. तीनों ही अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने 10 दिन पहले ही अमेरिका के शिकागो पहुंचे थे. इतने कम समय में ही उन्हें इस वारदात का शिकार होना पड़ा.
अमेरिका से मास्टर्स पूरी करने का सपना लेकर शिकागो पहुंचे भारतीय छात्रों को लूटपाट का शिकार होना पड़ा है. इतना ही नहीं इस वारदात में एक छात्र की मौत भी हो गई है. मामला शिकागो में तीन भारतीय छात्रों के साथ हुई लूटपाट की घटना और जानलेवा हमले का है. हमलावरों ने न सिर्फ उनसे लूटपाट की, बल्की फायरिंग कर एक छात्र को मौत के घाट उतार दिया. इस हमले में दूसरा स्टूडेंट गंभीर रूप से घायल है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं, तीसरा छात्र किसी तरह फायरिंग से बच गया है.
एजेंसी और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन तीन भारतीय छात्रों को निशाना बनाया गया है. वो तीनों ही महज 10 दिन पहले अपनी कॉलेज की पढ़ाई (MS) पूरी करने के लिए अमेरिका के शिकागो पहुंचे थे. हमला अमेरिकी समय के मुताबिक रविवार को हुआ. मूल रूप से आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा का रहने वाला नंदपु देवांश (23) दस दिन पहले ही शिकागो की गवर्नर स्टेट यूनिवर्सिटी में मास्टर कोर्स करने के लिए अमेरिका पहुंचा था.
देवांश यहां हैदराबाद के कोप्पला साईं चरण (22) और विशाखापत्तनम के लक्ष्मण के साथ किराए का मकान लेकर रह रहा था. रविवार की शाम तीनों दोस्त एक साथ इंटरनेट कनेक्शन के लिए राउटर खरीदने वॉलमार्ट जा रहे थे. वो अभी प्रिंसटन पार्क के पास पहुंचे ही थे कि अचानक बंदूकधारी हमलावरों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया. लुटेरों ने तीनों से अपने मोबाइल फोन, पैसे और बाकी सामान सौंपने के लिए कहा. तीनों ने अपने फोन उन्हें सौंपकर अनलॉक करने के लिए मोबाइल के पिन भी बताए. मौका देखकर तीनों ने वहां से भागने की कोशिश की. लेकिन हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी.
हमले में देवांश और साईं चरण गंभीर रूप से घायल हो गए. जबकि, लक्ष्मण फायरिंग से बचने में कामयाब रहे. सूचना मिलने पर कुछ ही देर में मौके पर पुलिस भी पहुंच गई. तीनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां घटना के अगले दिन सोमवार को देवांश की मौत हो गई. साईं चरण की हालत खतरे से बाहर है, लेकिन वह फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. घटना के बाद से दोनों छात्र सदमे में हैं.
पुलिस के मुताबिक देवांश ने हैदराबाद के एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था. वह शिकागो की गवर्नर स्टेट यूनिवर्सिटी में मास्टर कोर्स करने के लिए 13 जनवरी को ही अमेरिका पहुंचा था. बाकी के दोनों छात्र भी करीब 15 दिन पहले ही भारत से शिकागो पहुंचे थे.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








