
Sharda Sinha Networth: पटना में आलीशान घर... अपने दो बच्चों के लिए इतनी संपत्ति छोड़ गईं शारदा सिन्हा!
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Sharda Sinha Profile: आज की तारीख में छठ के गीत गाने वालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन शारदा सिन्हा के गाए छठ गीत आज भी उसी जगह हैं, जहां आज से दो दशक पहले थे. बिहार-झारखंड के लिए शारदा सिन्हा एक आदर्श थीं. उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है.
हर तरफ छठ पूजा की गूंज है, घर-घर से छठ गीतों की आवाज आ रही है. संयोग देखिए आस्था के महापर्व छठ से जुड़े अधिकतर मधुर और पारंपरिक गीतों को जिसने आवाज दी, वो आवाज छठ पर्व के बीच ही हमेशा के लिए खामोश हो गई. जैसे ही कल लोगों को ये खबर मिली कि स्वर कोकिला शारदा सिन्हा (Sharda Sinha Passed Away) अब हमारे बीच नहीं रहीं, लोग मायूस हो गए. क्योंकि एक तरफ शारदा सिन्हा के छठ गीत कानों में गूंज रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वो इसी मौके पर अनंत यात्रा के लिए निकल पड़ीं.
दरअसल, छठ एक महापर्व है, इसे शारदा सिन्हा के गीतों ने देश-दुनिया में और लोकप्रिय बना दिया है. पिछले तीन दशक में बिहार-झारखंड से लेकर देश में बहुत बदलाव हुए, त्योहार मनाने के तरीके भी बदले, इस दौरान छठ पूजा का विस्तार गांव से लेकर शहर तक, न्यूयॉर्क और लंदन जैसे दुनिया के बड़े शहरों तक हो गया है. लेकिन छठ पर आज भी वही शारदा सिन्हा के गीत बजते सुनाई देते हैं, शारदा सिन्हा के छठ गीतों से लोग भाव-विभोर हो जाते हैं, इसमें पवित्रता और परंपरा का समागम होता है.
शारदा सिन्हा की आवाज सदा अमर
हालांकि, आज की तारीख में छठ के गीत गाने वालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन शारदा सिन्हा के गाए छठ गीत आज भी उसी जगह हैं, जहां आज से दो दशक पहले थे. बिहार-झारखंड के लिए शारदा सिन्हा एक आदर्श थीं. उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. लेकिन उनके गीतों की गूंज सदैव बनी रहेगी.
शारदा सिन्हा का निधन 5 नवंबर, 2024 को दिल्ली के एम्स में हुआ, वह 72 वर्ष की थीं, और पिछले कुछ वर्षों से बीमार चल रही थीं. बीच-बीच में वो अपने गीतों के माध्यम से वापसी भी कर रही थीं. लेकिन कल वो जिंदगी की जंग हार गईं. साल 2018 में शारदा सिन्हा को मल्टिपल मायलोमा होने की खबर सामने आई थी.
शारदा सिन्हा के परिवार के बारे में













