
Russia-Ukraine War: रूस की बढ़ेंगी मुश्किलें? यूक्रेन को लड़ने के लिए मिल रहे ये खतरनाक हथियार
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सिर्फ अमेरिका ही नहीं, कई देश अब रूस के खिलाफ यूक्रेन को हथियार मुहैया करा रहे हैं. मिसाइलों के साथ-साथ टैंक भी दिए जा रहे हैं. इनकी मदद से यूक्रेन ना दोनेत्स्क और लुहांस्क में रूस पर पलटवार कर रहा है, बल्कि कई इलाकों में बाइडेन का J फैक्टर रूस पर भारी पड़ रहा है. दोनेत्स्क वैसे तो रूसी कब्जे में है, मगर अमेरिका से मिली जैवलिन और स्टिंगर मिसाइलों की मदद से यूक्रेन ने रूसी सेना के कैंप को निशाना बनाया. यहां पर यूक्रेन के जब्त हथियार रखे थे. जब यूक्रेन ने हमला किया तब आजतक रिपोर्टर गीता मोहन मौके पर मौजूद थीं. रूस बोर्दियांका से लेकर होस्तोमेल को पूरी तरह तबाह कर चुका है. मारियूपोल में एक लाख 20 हजार लोग खाने पानी तक को तरस गए हैं. लेकिन रूस के खिलाफ यूक्रेन का युद्ध कई देशों तक फैलता नजर आ रहा है. वहीं जिस यूक्रेन को लेकर पुतिन का अंदाजा था कि वो 5 दिनों में हथियार डाल देगा, वो घातक हथियारों से लैस होकर उनकी फौज को तबाही करने निकल पड़ा है. ज्यादा जानकारी के लिए देखें वीडियो.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








