
Pakistan Political Crisis: इमरान खान पर अटैक, सेना-ISI-सरकार की साजिश?
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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अस्पताल से बाहर आ चुके हैं. छुट्टी मिलते ही उन्होंने बगैर देर किए पीएम शहबाज समेत तीन बड़े चेहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए. फिर तो इमरान के बयान को लेकर घमासान छिड़ गया. पूर्व पीएम के निशाने पर रहे वर्तमान गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह अब तमाम आरोपों को सबसे बड़ा फ्रॉड करार दे रहे हैं. शुभांकर मिश्रा के साथ इस बुलेटिन में देखिए ये रिपोर्ट.

ऑपरेशन सिंदूर के महज चार दिन बाद 14 मई 2025 को शाम 4:59 बजे पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को रीसेट करने की कोशिश की थी, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा. पाकिस्तान की इस कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स की ओर से विदेश विभाग को भेजा गया एक खास ईमेल था. इस ईमेल के जरिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसीम मुनीर की आगामी वाशिंगटन यात्रा के एजेंडे और रणनीतिक बिंदुओं पर चर्चा की थी.

अमेरिका ने ईरान पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर एक बड़ा आर्थिक हमला किया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस नई नीति का असर भारत समेत करीब 147 देशों पर पड़ेगा जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं. ईरान तेल और गैस समेत कई उत्पादों का बड़ा निर्यातक है और ओपेक देश भी है. भारत और ईरान के बीच व्यापार पिछले पांच सालों में 84 प्रतिशत तक गिर चुका है. भारत मुख्य रूप से ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है, जबकि ईरान से सूखे मेवे और केमिकल्स आयात करता है.

मुस्लिम ब्रदरहुड पर ट्रंप सरकार की बड़ी कार्रवाई, मिडिल ईस्ट में एक्टिव 3 ब्रांच को घोषित किया आतंकी
अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड के लेबनान, जॉर्डन और मिस्र के गुटों को आतंकी संगठन घोषित किया है. लेबनानी गुट को विदेशी आतंकी संगठन की सूची में डाला गया है जबकि जॉर्डन और मिस्र के गुटों पर हमास को समर्थन देने का आरोप है. यह फैसला ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश के तहत लिया गया है.

राजदूतों को तलब करने का ये कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कई दिनों से जारी हैं. बता दें कि पिछले हफ्तों में विदेशों के कई देशों ने प्रदर्शनकारियों के लिए सकारात्मक बयान दिए थे, जिससे तेहरान प्रशासन नाराज चल रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को नहीं.









