
PAK को चीन से मिली PL-15 मिसाइल, ड्रैगन की भूमिका के बाद 'हॉट स्टैंडबाय' पर भारत
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सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि पाकिस्तान ने चीन से मिली PL-15 मिसाइलों को चलाने के लिए 'थर्ड पार्टी' ऑपरेटरों का इस्तेमाल किया. जिन्हें पाकिस्तानी वायुसेना के जेट विमानों से दागा गया था, जो भी चीनी मूल के थे.
भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (LoC) पर कुछ दिनों की भीषण झड़पों के बाद शांति बनी हुई है. हालांकि भारतीय सशस्त्र बल अभी भी 'हॉट स्टैंडबाय' पर हैं. शीर्ष सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि पाकिस्तानी सेना या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादियों द्वारा किसी भी तरह की कोशिश की स्थिति में जवाबी कार्रवाई के लिए सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं.
इंडिया टुडे टीवी को ऑपरेशन सिंदूर के बाद पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हवाई संघर्ष को लेकर भी अहम जानकारी भी मिली है. इसमें युद्धक्षेत्र से दूर बने कमांड सेंटर्स के माध्यम से हवा से दागी गई मिसाइलों का नियंत्रण शामिल है. साथ ही तुर्की की भूमिका भी सामने आई है. जिसने पाकिस्तान की ड्रोन गतिविधियों में समर्थन दिया था.
सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि पाकिस्तान ने चीन से मिली PL-15 मिसाइलों को चलाने के लिए 'थर्ड पार्टी' ऑपरेटरों का इस्तेमाल किया. जिन्हें पाकिस्तानी वायुसेना के जेट विमानों से दागा गया था, जो भी चीनी मूल के थे. भारत का मानना है कि ये मिसाइलें सैटेलाइट या एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कमांड सिस्टम (AEW&CS) की मदद से चलाई गईं, जो वास्तविक ऑपरेशन क्षेत्र से बाहर थे.
इस 'फ्यूजन ऑपरेशन' की वजह से मिसाइलें भारतीय रडार पर बहुत देर से दिखाई दीं, जिससे उनका मुकाबला करना और भी मुश्किल हो गया. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि कई मिसाइलें मिसफायर हो गईं, जबकि अन्य को भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया.
तुर्की-पाकिस्तान-चीन गठजोड़
सूत्रों ने तुर्की की भूमिका पर भी चिंता जताई. जानकारी के मुताबिक तुर्की ने न सिर्फ पाकिस्तान को सशस्त्र ड्रोन बेचे, बल्कि ड्रोन संचालन में भी सक्रिय रूप से मदद की, जिनका इस्तेमाल भारतीय नागरिकों और सैनिकों पर हमलों में किया गया. सूत्रों ने कहा कि ऐसे व्यवहार की उम्मीद उस देश से नहीं की जाती है, जिसकी भारत ने 2023 के भूकंप के बाद मदद की थी, उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम 'चीन-तुर्की-पाकिस्तानी गठजोड़' की ओर इशारा करती है.

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