
'ड्रोन और मिसाइलों का डर था...' नंदादेवी से LPG लेकर आए ऑफिसर ने बताई होर्मुज की कहानी
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलपीजी लेकर आए नंदादेवी के ऑफिसर ने बताया है कि इस संकट में शिप लाना कितना अलग था और उनका क्या अनुभव था.
ईरान जंग में सबसे राहत की खबर थी शिवालिक और नंदादेवी का भारत आगमन, जो युद्ध के इस माहौल में हजारों मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत पहुंचे थे. जब ये दो जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे थे, उस वक्त पूरा भारत उनके सुरक्षित भारत पहुंचने की दुआ कर रहा था. लेकिन, सोचिए उन लोगों के बारे में जो आसमान में उड़ती मिसाइलों और ड्रोन के बीच नंदादेवी लेकर भारत पहुंचे, उस वक्त उनका क्या अनुभव रहा होगा. ऐसे में हमने मर्चेंट नेवी के अफसर से बात की है, जो उस वक्त नंदादेवी में थे और भय के माहौल में संकट की घड़ी में एलपीजी लेकर भारत आ रहे थे.
इस बारे में हमने नंदादेवी के चीफ ऑफिसर कृष्ण गोदारा से बात की, जिन्होंने बताया कि जब नंदा देवी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहा था तो उस वक्त कैसा माहौल था. कृष्ण गोदारा हरियाणा के फतेहाबाद के रहने वाले हैं.
'ड्रोन मिसाइल का डर था'
उन्होंने बताया कि वो लंबे वक्त से शिप लेकर आते जाते रहे हैं, लेकिन इस बार का माहौल कुछ था. इस बार डर था कि कुछ गलत ना हो जाए. वॉर की स्थिति में मिसाइल और ड्रोन का भी डर रहता है, लेकिन अब बिना किसी दिक्कत के भारत पहुंच गए. इस बार सबसे मुश्किल डर का माहौल था. क्या इस बार जल्दी पहुंचने का कोई पेनिक था, उस सवाल पर गोदारा ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं था. वस वॉर टाइम की एंजाइटी थी और हल्का मुश्किल था.
कितने दिन से वहां थे?
वो करीब 4 महीने से नंदा देवी पर ही हैं और 27 तारीख को वहां पहुंचे थे और 13 दिन शिप एंकर पर था. यानी वो वहां रुके हुए थे. इसके बाद 13 तारीख को वो कतर से एलपीजी मिली और उसे लेकर भारत के लिए रवाना हुए. इसके बाद 17 मार्च को भारत पहुंचे थे. वे अभी भी वो शिप पर ही हैं.

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