
'ISIS की खिलाफत करने वाले देश हमास से लड़ें, ये नया वर्जन है,' इटली की PM से मुलाकात में बोले नेतन्याहू
AajTak
इजरायली पीएम नेतन्याहू ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से मुलाकात की. उससे पहले साइप्रस के राष्ट्रपति से भी मिले. नेतन्याहू ने कहा कि आज हमें इस बर्बरता को हराना है. यह हमारे लिए सबसे कठिन समय है. हमें इस बर्बरता को हराना है. यह सभ्यता की ताकतों और राक्षसी बर्बर लोगों के बीच एक लड़ाई है.
इजरायल और हमास के बीच 15 दिन से जंग चल रही है. ये जंग अब तक किसी अंजाम तक नहीं पहुंची है. इजरायल सरकार लगातार हमास के लड़ाकों को मारने का संकल्प दोहरा रही है. इस बीच, शनिवार को इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी से मुलाकात की और युद्ध में साथ खड़े होने पर धन्यवाद जताया. इसके साथ ही नेतन्याहू ने हमास को नया आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) बताया.
नेतन्याहू ने कहा, यह एक तरह से परीक्षा है. सभ्यता की परीक्षा और हम इस परीक्षा को जीतेंगे. उन्होंने आगे कहा, हम उन सभी देशों से उम्मीद करते हैं जो आईएसआईएस से लड़ने के लिए एकजुट हुए हैं, वे एकजुट होकर हमास से लड़ें, क्योंकि हमास नया आईएसआईएस है.
'हमें बर्बरता को हराना है'
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी से कहा, यहां आने और इजरायल के साथ खड़े होने के लिए आपका धन्यवाद देते हैं. यह हमारे लिए सबसे कठिन समय है. हमें इस बर्बरता को हराना है. यह सभ्यता की ताकतों और राक्षसी बर्बर लोगों के बीच एक लड़ाई है. उन लोगों ने निर्दोष लोगों, मासूमों, बुजुर्गों की हत्याएं कीं. अंग-भंग किए. रेप किया और सिर काट दिया, जला दिया.
'हमें आतंकवाद से लड़ना होगा'
वहीं, प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा, मैं यहां आकर खुश हूं. मुझे लगा कि इटली सरकार और इटली के लोगों की यहां एकजुटता दर्शाने के लिए व्यक्तिगत रूप से आना बहुत महत्वपूर्ण है. आपको यह बताना कि हमने ऐसी तस्वीरें देखीं हैं, जो अविश्वसनीय थीं. यह ऐसी चीज है जिससे हमें कल और आज लड़ना है. हम इजराइल के अस्तित्व, अपनी रक्षा और अपने लोगों की सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करते हैं. हम पूरी तरह से समझते हैं कि आतंकवाद से लड़ना होगा. हमारा मानना है और हम सोचते हैं कि आप इसे निर्णायक लड़ाई तक ले जाएंगे. हम उन आतंकवादियों से अलग हैं.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.








