
Iran Crisis Impact On India: ईरान में अशांति... भारत के लिए बड़ी परेशानी, जानिए क्या-क्या मंगाता है India
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Iran Crisis Impact On India: ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और Iranian Currency में आई भारी गिरावट को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब सियासी स्तर पर पहुंचने के बाद हिंसक रूप ले चुके हैं. जून 2025 में Israel-US से टकराव के एक साल से भी कम समय में यह दूसरी बार है जब ईरान संकट में फंसा है.
ईरान में उथल-पुथल (Iran Crisis), हंगामा और अशांति है. देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जिससे उसे एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया गया है. भारत के लिए यह संकट कोई दूर का नहीं है, क्योंकि Iran भारत के कुछ सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के केंद्र में स्थित है और वहां पर किसी भी तरह के अस्थिरता सीधे भारत के रणनीतिक और व्यापारिक हितों से जुड़ी हुई है. आइए समझते हैं कि अगर ईरान में अशांति बढ़ी, तो फिर ये भारत के लिए कैसे परेशानी का सबब बन सकती है?
Iran में लगातार बिगड़ रहे हैं हालात सबसे पहले बात करते हैं ईरान के बिगड़े हालात के बारे में, तो Iran में बीते साल दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए आर्थिक संकट के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन अब बड़ा रूप ले चुके हैं. देश में शुरूआती विरोध तो महंगाई, बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले लगातार गिरती ईरानी मुद्रा को लेकर था, लेकिन अब ये शासन को चुनौती देता नजर आ रहा है. रिपोर्ट्स की मानें तो इसे लेकर मचे हंगामे में अब तक करीब 78 लोगों की मौत की खबर है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, ये आंकड़ा कहीं ज्यादा हो सकता है. हालात ये बन गए हैं कि Iran Govt ने देश में बीते 7 जनवरी से ही इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं.
ईरान संकट का भारत पर सीधा असर भारत ने मध्य एशिया, रूस (Russia) और यूरोप (Europe) तक अपनी पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से तमाम परियोजनाओं में भारी निवेश किया है, जिसमें ईरान एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब के रूप में काम करता है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) है, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए भारत को अफगानिस्तान और मिडिल ईस्त तक सीधा रास्ता मुहैया कराता है.
ईरान-भारत के बीच कितना व्यापार? वाणिज्य विभाग द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों के अनुसार, FY2024-25 (अप्रैल 2024-मार्च 2025) में भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. इसमें भारत ने 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था, जबकि 0.44 अरब डॉलर का आयात किया गया था. इसके चलते नई दिल्ली को 0.80 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस प्राप्त हुआ. अब अगर संकट बढ़ता है, तो फिर चाबहार बंदरगाह पर परिचालन को धीमा हो सकता है और INSTC से माल ढुलाई बाधित होने की संभावना है.
India-Iran में किन चीजों का आयात-निर्यात? हालिया सालों में भारत ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है. ईरान को भारत से पहुंचाए जाने वाले (India Export To Iran) प्रमुख सामानों में चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर, विद्युत मशीनरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी शामिल हैं. इसके अलावा ईरान से भारत आने वाले (India Import From Iran) की बात करें, तो इनमें सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन के साथ ही कांच के बर्तन सबसे ज्यादा मात्रा में आयात किए जाते हैं.













