
Indian Air Force Day: जब PAK ने उड़ाए भारत के 9 एयरबेस, 24 घंटे में IAF ने दुश्मन को दिया मुंहतोड़ जवाब... 1971 की जंग की कहानी
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1971 का दिसंबर महीना. पाकिस्तान के फाइटर जेट्स ने भारत में घुसकर 9 एयरबेस पर हमला किया. रनवे बिगाड़े. इसके 24 घंटे बाद भारतीय वायुसेना ने जो कार्रवाई की, वो पाकिस्तान और उनकी सरकारों की आत्मा को हमेशा कुरेदेगी. IAF ने 24 घंटे में ऐसा हमला किया कि पाकिस्तान की होश और धज्जियां दोनों उड़ गए.
1971 के युद्ध के अंत में जब लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाले. तब एक सीनियर IAF अधिकारी ने पूछा कि आपने सरेंडर क्यों किया? नियाजी ने भारतीय अधिकारी की वर्दी पर लगे विंग्स की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम्हारी वजह से, भारतीय वायुसेना की वजह से.
कहानी शुरू होती है बांग्लादेश के विभाजन से. बांग्लादेश को पश्चिमी पाकिस्तान से अलग करने के लिए भारत उसकी मदद कर रहा था. ये बात पाकिस्तान को पसंद नहीं थी. पाकिस्तान ने बांग्लादेश में भयानक तबाही मचाई. सामूहिक संहार किया. भारत, सोवियत संघ, जापान, यूरोप इसका विरोध कर रहे थे. अमेरिका और चीन ने कम रुचि दिखाई थी. भारत ने अगस्त में सोवियत संघ के साथ 20 साल के लिए कॉपरेशन ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए. इससे पाकिस्तान को समझ आ गया कि भारत अब हथियारबंद हमला कर सकता है. बांग्लादेश की मदद करने के लिए भारत, पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा सकता है.
पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश में भारतीय जवान पश्चिमी पाकिस्तानी फौजियों को मार रहे थे. अक्टूबर में भारतीय सैनिकों ने गरीबपुर में दो पाकिस्तानी फाइटर जेट्स को मार गिराया था. इस जगह हो रहे युद्ध को इतिहास में बोयरा की जंग (Battle of Boyra) के नाम से पुकारते हैं. पाकिस्तान समझ गया था कि अब भारत से युद्ध होकर रहेगा. लेकिन भारत इसकी शुरुआत नहीं कर रहा था. पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहया खान को जनरल अयूब खान की साजिश पसंद आई. जिसमें अयूब खान ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान की सुरक्षा पश्चिम के हाथ में है. प्लान था कि भारत के बड़े पश्चिमी इलाके को कब्जे में लेकर फिर बांग्लादेश को छुड़वाने की.
जनरल टिक्का खान ने भारत पर हमले की योजना बताई. जिसे ऑपरेशन चंगेज खान (Operation Chengiz Khan) नाम दिया गया. पाकिस्तान चाहता था कि वो पहले हमला करके भारतीय वायु सेना और सरकार दोनों को कमजोर कर दे. उसने कोशिश भी की. लेकिन कुछ बिगाड़ नहीं पाया. उसने सिर्फ कुछ रनवे बिगाड़े, एक दो जगहों पर राडार सेंटर पर धमाका किया. लेकिन उसके बाद भारतीय वायुसेना ने अगले 24 घंटों में जो तबाही मचाई, उसे पाकिस्तान अपने अंत तक याद रखेगा.
इंदिरा गांधी कलकत्ता में थीं, जब PAF का हमला हुआ
लेखक जेवियर मोरो की किताब द रेड सारी (The Red Sari) में लिखा है कि 3 दिसंबर 1971 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कलकत्ता में एक बड़ी रैली को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने रैली में कहा कि भारत शांति चाहता है. लेकिन युद्ध करना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे. क्योंकि यह हमारी सुरक्षा व आदर्शों का प्रश्न है. अभी वे भाषण दे ही रही थीं कि उनके सचिव एक चिट लेकर आए. जिस पर लिखा था कि पाकिस्तानी लड़ाकुओं ने हमारे उत्तर, उत्तर-पश्चिम और पश्चिम के 9 एयरबेस बम से उड़ा दिए हैं. इनमें अमृतसर, आगरा और श्रीनगर भी शामिल हैं.

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