
Harvard पर ट्रंप का ताजा एक्शन, अब 100 मिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करने का दिया निर्देश
AajTak
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच विवाद और बढ़ गया है. अमेरिकी फेडरल एजेंसियों को हार्वर्ड के साथ 100 मिलियन डॉलर के सरकारी कॉन्ट्रेक्ट्स रद्द करने का निर्देश दिया गया है. यह कदम ट्रंप की हार्वर्ड के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें फंडिंग कटौती और इंटरनेशनल स्टूडेट्स को लेकर कड़े कदम शामिल हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच जारी तनाव अब और बढ़ गई हैं. एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि संघीय एजेंसियों को हार्वर्ड के साथ लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कॉन्ट्रेक्ट रद्द करने के लिए कहा गया है. यह प्रशासन और मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच टकराव की एक नई कड़ी है.
जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन (GSA) ने फेडरल डिपार्टमेंट्स को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें उन्हें हार्वर्ड के साथ जारी कॉन्ट्रेक्ट्स की समीक्षा कर उन्हें समाप्त करने और अन्य विकल्प तलाशने का निर्देश दिया गया है.
यह भी पढ़ें: 'हार्वर्ड के पास ₹4 अरब से ज्यादा फंड', अमेरिकी कोर्ट की रोक के बाद ट्रंप के तेवर गरम, मांगी 31% स्टूडेंट्स की डिटेल्स
2.6 बिलियन डॉलर से अधिक की सरकारी फंड्स को रोक
ट्रंप प्रशासन पहले ही हार्वर्ड को मिलने वाले 2.6 बिलियन डॉलर से अधिक की सरकारी फंड्स को रोक दिया था. अप्रैल में यह विवाद तब और गहरा गया जब हार्वर्ड ने ट्रंप प्रशासन की यूनिवर्सिटी की नेतृत्व, शासन और प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करने की मांग के खिलाफ मुकदमा दायर किया. इसके बाद से ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग में कटौती की, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के एडमिशन पर रोक लगाने की कोशिश की और यूनिवर्सिटी को टैक्स रिलीफ से भी वंचित करने की कोशिश की.
अब रद्द किए जाने वाले 30 कॉन्ट्रेक्ट्स में 9 फेडरल एजेंसियों से जुड़े प्रोग्राम शामिल हैं, जिनमें वैज्ञानिक शोध, स्नातक छात्र सेवाए, और होमलैंड सिक्योरिटी अधिकारियों के लिए नेतृत्व प्रशिक्षण हैं. प्रशासन के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कुछ अहम कॉन्ट्रेक्ट्स तुरंत नहीं रद्द किए जाएंगे लेकिन उन्हें अन्य वेंडर्स को सौंपा जाएगा. गौर करने वाली बात ये है कि ट्रंप की ये कार्रवाई ताजी है, और ये सिर्फ फेडरल कॉन्ट्रेक्ट्स पर लागू होते हैं, जिनकी वैल्यू 100 मिलियन डॉलर की है.

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल में एक संघीय अधिकारी की गोली से नर्स एलेक्स जेफ्री प्रेटी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से अमेरिका में पुलिस और फेडरल एजेंसियों की कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों में जाने वालों और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस बीच वॉशिंगटन में प्रेटी की याद में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. देखें अमेरिका से जुड़ी 10 बड़ी खबरें.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.








