
FIFA World Cup Trophy: कोई भी बने विजेता, नहीं मिलेगी असली ट्रॉफी... जानें क्या है पूरा मामला
AajTak
फीफा वर्ल्ड कप 2022 के फाइनल में फ्रांस और अर्जेंटीना की टक्कर होने जा रही है. अर्जेंटीना ने क्रोएशिया और फ्रांस ने मोरक्को को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह पक्की की है. फाइनल मुकाबले के बाद विजेता टीम को जो ट्रॉफी दी जाएगी उसकी कहानी काफी दिलचस्प है.
कतर में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल में आज (18 दिसंबर) फ्रांस का सामना अर्जेंटीना से होना है. यह फाइनल मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 8.30 बजे से दोहा के लुसैल स्टेडियम में खेला जाएगा. मौजूदा चैम्पियन फ्रांस जहां तीसरी बार खिताब जीतने की कोशिश करेगी. वहीं लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना का भी लक्ष्य तीसरी बार खिताब जीतने पर होगा. फ्रांस ने मोरक्को और अर्जेंटीना ने क्रोएशिया को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह पक्की की है.
...तो नहीं मिलेगी ओरिजनल ट्रॉफी
फाइनल मुकाबले के बाद विजेता टीम को जो ट्रॉफी दी जाएगी उसकी भी कहानी काफी दिलचस्प है. आज के फाइनल मुकाबले की विजेता टीम को ओरजिनल ट्रॉफी केवल जश्न मनाने के लिए ही दी जाएगी. पुरस्कार समारोह के बाद फीफा के अधिकारी विजेता टीम से असली ट्रॉफी ले लेंगे. यानी कि फ्रांस/अर्जेंटीना की टीम को यह ट्रॉफी अपने घर ले जाने के लिए नहीं मिलेगा. इसकी जगह विजेता टीम को डुप्लिकेट ट्रॉफी दी जाएगी. यह डुप्लिकेट ट्रॉफी (Replica) कांस्य की होती है और उसपर सोने की परत लगी होती है.
देखा जाए तो फीफा वर्ल्ड कप की ओरिजनल ट्रॉफी ज्यादातर समय ज्यूरिख स्थित फीफा के हेडक्वार्टर में ही रहती है. फीफा वर्ल्ड कप टूर, वर्ल्ड कप के मुकाबले के दौरान ही इसे दुनिया के सामना लाया जाता है. साल 2005 में फीफा ने नियम बनाया था कि विजेता टीम ओरिजनल ट्रॉफी अपने घर नहीं ले जाएगी.
पहले दी जाती थी जूल्स रिमेट ट्रॉफी
पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप की शुरुआत 1930 में हुई थी. उस समय विजेता टीम को जो ट्रॉफी दी गई थी उसका नाम जूल्स रिमेट ट्रॉफी था. जूल्स रिमेट ट्रॉफी 1970 तक चैम्पियन टीमों को प्रदान की गई. इसके बाद वर्ल्ड कप ट्रॉफी को नए सिरे से डिजाइन किया गया. नई ट्रॉफी को डिजाइन करने का काम इटालियन आर्टिस्ट सिल्वियो गजानिया को दिया गया था. साल 1974 के सीजन से यही ट्रॉफी दी जाती है जिसे फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी कहा जाता है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का आज 23वां दिन है. अब ये जंग परमाणु प्लांट पर हमलों तक पहुंच गई है. एक दिन पहले इजरायल ने नतांज में ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को टारगेट किया, जिसके जवाब में ईरान ने डिमोना और अराद शहरों पर भीषण हमला कर दिया. ईरान के ये हमले युद्ध को और भीषण बना सकते हैं क्योंकि अब इजरायल तेहरान में लगातार कई ठिकानों को निशाना बना रहा है. नेतन्याहू ने इस समय को इजरायल के अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई का एक चुनौतीपूर्ण पड़ाव बताया है. वहीं ईरान दावा कर रहा है कि डिमोना और अराद पर हमले के बाद युद्ध का पूरा समीकरण बदल गया है.

आज बात पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दंगल की जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है. बंगाल की सियासत इस वक्त अपने चरम पर है, जहां हर बयान, हर कदम और हर मंच चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है. कल ईद के मौके पर मंदिर -मस्जिद का रंग देखने को मिला. ममता बनर्जी ने कोलकाता में ईद के मौके पर बीजेपी के घुसपैठिए वाले मुद्दे पर अबतक का सबसे बड़ा पलटवार किया. ईद-उल-फितर के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में ममता ने पीएम मोदी को सबसे बड़ा घुसपैठिया बता दिया. ये वही मुद्दा है जिस पर पीएम मोदी लगातार ममता सरकार को घेर रहे हैं. ममता के बयान पर बीजेपी ने हार की हताशा में दिया गया बयान बताया. वहीं बीजेपी ने भी बंगाल में अपने वोटरों को मैसेज दिया है. शुभेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और मां काली से आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि बंगाल में घुसकर बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बहुत अत्याचार किया है. बंगाल में अगले महीने दो चरण में वोटिंग होनी है. ऐसे में जैसे-जैसे तारीख नजदीक आएगी, बयान और भी तीखे होंगे और सियासी चालें और भी पेचीदा. लेकिन सवाल ये कि क्या बंगाल मंदिर-मस्जिद की राजनीति से बाहर निकल पाएगी. इस बार बंगाल में किस पार्टी की नैरेटिव का सिक्का चलेगा. बीजेपी-टीएमसी की आमने-सामने की लड़ाई में आखिर कांग्रेस और कभी 34 साल तक लगातार सरकार में रहने वाली लेफ्ट क्या कर रही है.

दिल्ली में जद (यू) के पूर्व नेता केसी त्यागी ने रविवार को राष्ट्रीय लोक दल जॉइन कर लिया. उन्होंने जयंत चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. इससे पहले मंगलवार को उन्होंने बिना कारण बताए जद (यू) से इस्तीफा दिया था. 2003 से पार्टी से जुड़े त्यागी महासचिव, प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं.

पंजाब की मान सरकार की 'एकमुश्त निपटान स्कीम' को व्यापारियों का भारी समर्थन मिला है. पुराने टैक्स बकाये के जरिए अब तक सरकारी खजाने में 111.16 करोड़ रुपये आ चुके हैं. हालांकि, इस राहत का फायदा सिर्फ 31 मार्च तक ही उठाया जा सकता है. इसके बाद सरकार नरम रुख छोड़कर सख्त एक्शन लेगी और करीब 8,000 संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी.

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का आज 23वां दिन है. अब ये जंग परमाणु प्लांट पर हमलों तक पहुंच गई है. एक दिन पहले इजरायल ने नतांज में ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को टारगेट किया, जिसके जवाब में ईरान ने डिमोना और अराद शहरों पर भीषण हमला कर दिया. ईरान के ये हमले युद्ध को और भीषण बना सकते हैं क्योंकि अब इजरायल तेहरान में लगातार कई ठिकानों को निशाना बना रहा है. नेतन्याहू ने इस समय को इजरायल के अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई का एक चुनौतीपूर्ण पड़ाव बताया है. वहीं ईरान दावा कर रहा है कि डिमोना और अराद पर हमले के बाद युद्ध का पूरा समीकरण बदल गया है.

विश्व जल दिवस पर 'जल है तो कल है' जैसे नारे सुनने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत आज भी बहुत कड़वी है. सरकारी कागजों में 'हर घर जल' के बड़े-बड़े दावे तो दिखते हैं, पर असलियत में आज भी लोगों को प्यास बुझाने के लिए दूर-दूर तक पैदल चलना पड़ रहा है. कई परिवारों को तो पानी के लिए खुद कुएं तक खोदने पड़ रहे हैं. जब तक पानी के लिए यह जानलेवा संघर्ष और लंबी कतारें खत्म नहीं होतीं, तब तक ये जल दिवस सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख बनकर ही रह जाएगा.







