
Amul Milk: सात दशक पहले हुई थी शुरुआत... आज देश की नंबर-1 डेयरी कंपनी, दिलचस्प है अमूल की सक्सेस स्टोरी
AajTak
Amul's Golden Jubilee Celebration : 1946 में छोटी सी शुरुआत आज देश का नंबर-1 ब्रांड बन चुका है. अमूल के गोल्डल जुबली समारोह में शिरकत करने पहुंचे PM Narendra Modi ने इसकी जमकर तारीफ की है और कहा कि 'Amul जैसा कोई नहीं...'
अमूल (Amul), ये नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. बच्चे से लेकर बूढ़े तक पैकेज्ड मिल्क ब्रांड अमूल से परिचित होंगे. गुजरात से आजादी से पहले शुरू हुआ सफर आज एक बड़े कारोबार और देश के नंबर एक मिल्क ब्रांड में तब्दील हो चुका है. गुरुवार को अमूल ब्रांड का संचालन करने वाला गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) गोल्डन जुबली सेलिब्रेट कर रहा है और इस मौके पर आयोजित समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Amul को दुनिया में नंबर-1 डेयरी कंपनी बनाने की गारंटी दी है. आइए जानते हैं कि कैसे शुरू हुई थी ये कंपनी और कैसे बन गया इतना बड़ा मिल्क ब्रांड?
Amul को नंबर-1 बनाने की गारंटी Amul ब्रांड आज दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है. न केवल दूध बल्कि इस कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स की खासी डिमांड है. इनमें मिल्क पाउडर, हेल्थ बेवरेज, घी, मक्खन, चीज, पिज्जा चीज, आइसक्रीम, पनीर, चॉकलेट और पारंपरिक भारतीय मिठाईयां शामिल हैं. गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) के स्वर्ण जयंती समारोह में गुरुवार को पहुंचे PM Narendra Modi ने अमूल ब्रांड की जमकर तारीफ की और इसे सहकार का सामर्थ्य करार दिया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के गांवों ने मिलकर 50 वर्ष पहले जो पौधा लगाया था, वो आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी शाखाएं देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैल गई हैं. PM Modi ने कहा कि आज Amul दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी डेयरी कंपनी है और इसे दुनिया की नंबर एक डेयरी कंपनी बनाना है. उन्होंने कहा ऐसा होगा और ये 'मोदी की गारंटी' है.
77 साल पहले ऐसे पड़ी थी अमूल की नींव अमूल मिल्क कंपनी (Amul Milk Company) का 50 साल का सफर बेहद ही सफलता भरा रहा है. इसकी शुरुआत 77 साल पहले साल 1946 में हुई थी. इसे कैसे शुरू किया गया ये कहानी भी खासी दिलचस्प है. दरअसल, आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड यानी AMUL डेयरी सहकारी संस्था है, जो गुजरात के आणंद में स्थित है. इसकी शुरुआत से पहले तक दुग्ध उत्पादक अपना दूध बिचौलियों और व्यापारियों को बेचने को मजबूर थे, मगर इनकी शोषणपूर्ण नीतियों के चलते यह जरूरत महसूस की गई कि एक सहकारी समिति स्थापित की जाए, जिसमें दुग्ध उत्पादकों के ही प्रतिनिधि हों, और यह समिति दुग्ध उत्पादकों के हितों का ध्यान रखें.
Amul की शुरुआत में सरदार पटेल का बड़ा रोल ये वो समय था जबकि अंग्रेजों के खिलाफ भारत की आजादी का आंदोलन अपने अंतिम दौर में था. स्वतंत्र भारत की सुगबुगाहट तेज होने लगी थी. लेकिन आजादी की लड़ाई से इतर गुजरात के कैरा में गाय और भैंस का दूध बेचकर अपना घर-बार चलाने वाले किसान दलालों के बीच फंसे थे. उन्हें दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था और दलाल उनके ही दूध को बेचकर मोटा पैसा बना रहे थे. दूध का कारोबार ठेकेदारों और दलालों के बीच फंसा था.
फिर एक समय आया जब खुद के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ कैरा के किसानों ने विरोध शुरू किया और इसमें सरदार वल्लभभाई पटेल ने बड़ी भूमिका निभाई. इसी समय इस सेक्टर के लिए सहकारी समिति स्थापित करने का विचार आया और किसान एकजुट हो गए. नाम रखा गया कैरा जिला कॉपरेटिव दूध उत्पादक संगठन, जिसके दूध और तमाम प्रोडक्ट्स आज अमूल (Amul) के नाम से दुनिया के कई देशों में बिक रहे हैं.













