
2026: सदियों तक रही 11 मिनट की गड़बड़ी, 'लापता' हो गए 10 दिन, विज्ञान नहीं धार्मिक आस्था पर टिका है अंग्रेजी कैलेंडर
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आज 2026 का पहला दिन है. जिस कैलेंडर के आधार पर आज नया दिन मनाते हैं उसमें कई खामियां. ये कैलेंडर एक रोमन राजा के दिमागी खुराफात का परिणाम था. इस कैलेंडर को लागू करते हुए वो पूरे 10 दिन हड़प गया. इस 10 दिन का कोई हिसाब नहीं मिला. आज भी हमारा ये कैलेंडर लगभग आधा मिनट गड़बड़ है.
4 अक्टूबर 1582. रात हुई. यूरोप सोने चला गया. अगले दिन सुबह हुई तो तारीख 5 अक्टूबर 1582 नहीं थी. बल्कि ये 15 अक्टूबर था. 4 अक्टूबर से सीधा 15 अक्टूबर. पूरे 10 दिन का गोलमाल. क्रिश्चयन दुनिया में हाहाकार मच गया. मजदूरों ने "खोए हुए" दिनों के लिए पूरी सैलरी की मांग की, खगोलविदों ने कहा- हमारे रिसर्च और रिकॉर्ड बेकार हो गए. प्रोटेस्टेंट देशों ने सदियों तक इसका विरोध किया, और इसे कैथोलिकों की मनमानी बताया.
इंग्लैंड 1752 तक अड़ा रहा, जब "हमें हमारे 11 दिन वापस दो" के नारों के साथ वहां दंगे भड़क उठे. रूस 1918 तक और ग्रीस ने 1923 तक इस बदलाव को स्वीकार नहीं किया.
ये उस कैलेंडर की कहानी है जिसकी तारीखों पर आज लगभग पूरी दुनिया चलती है. हमारा अंग्रेजी कैलेंडर. जिसे ग्रेगोरियन कैलेंडर भी कहा जाता है. सदियां गुजर गईं ये 10 दिनों का घोटाला अभी भी कायम है. 10 दिनों को हड़पने का ये ऐतिहासिक फैसला वैज्ञानिक वजहों से नहीं, बल्कि धार्मिक और राजनीतिक निर्णय था. पहले जूलियन कैलेंडर फिर अंग्रेजी कैलेंडर
आज जिस अंग्रेजी कैलेंडर से दुनिया चलती वो 4 अक्टूबर 1582 को ही लागू हुआ था. इससे पहले यूरोप में जूलियन कैलेंडर चलता था. जूलियन कैलेंडर को जूलियस सीजर ने 45 ईसा पूर्व में लागू किया था. वह रोमन गणराज्य का राजा था.
लेकिन खगोलविदों, वैज्ञानिकों और काल गणना करने वाले पादरियों को एहसास हुआ कि ये कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा की गति के साथ मैच नहीं करता है.
बता दें कि ठीक इसी समय भारत में अलग अलग तरीकों से काल गणना हो रही थी. तब उत्तर और मध्य भारत में विक्रम संवत का इस्तेमाल हो था. इसे राजा विक्रमादित्य ने शुरू किया था और इस कैलेंडर को 57 ईसा पूर्व से शुरू माना जाता है.
