
ईसा मसीह के लास्ट सपर का अपमान? आर्ट वर्क पर विवाद के बाद बंद की गई कोच्चि प्रदर्शनी
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कोच्चि-मुज़िरिस बिएनाले में ‘द लास्ट सपर’ से मिलती-जुलती एक पेंटिंग पर ईसाई संगठनों ने धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया. विरोध के बाद वेन्यू अस्थायी रूप से बंद किया गया. कलाकार ने आरोपों को खारिज किया और गलत नीयत से इनकार किया.
ईसा मसीह के 'द लास्ट सपर' के एक वर्जन को दिखाने वाली एक आर्टवर्क के खिलाफ कैथोलिक और दूसरे ईसाई समूहों के विरोध के बाद कोच्चि-मुज़िरिस बिएनाले की एक जगह कुछ वक्त के लिए बंद कर दी गई है.
यह विवाद केरल के कलाकार टॉम वट्टाकुझी की एक पेंटिंग को लेकर है, जिसे बिएनाले के क्यूरेटेड शो 'इडम' के हिस्से के तौर पर दिखाया गया था.
ईसाई संगठनों ने आरोप लगाया कि यह आर्टवर्क धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जीसस क्राइस्ट और लास्ट सपर के पारंपरिक चित्रण का अपमान करता है.
सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर सवाल...
केरल लैटिन कैथोलिक एसोसिएशन ने तुरंत आर्टवर्क को हटाने की मांग की और 24 घंटे के अंदर माफी मांगने को कहा. एसोसिएशन के सेक्रेटरी बीजू जोसी करुमंचेरी ने एक फेसबुक पोस्ट में ईसाई धर्म का अपमान बताया और इसके लिए सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर सवाल उठाया.
उन्होंने लिखा, "यह मत सोचिए कि आप सरकारी पैसे का इस्तेमाल करके अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर जो चाहें दिखा सकते हैं. क्या आप हमारे टैक्स के पैसे से हमारा अपमान कर रहे हैं? दुनिया के मशहूर पेंटर लियोनार्डो दा विंची की दुनिया की मशहूर म्यूरल पेंटिंग भी इसी तरह बनाई गई थी."





