
हिन्दुओं जैसा विश्वास, आत्मा को मान्यता, सिर्फ एक ईश्वर में आस्था... कौन हैं द्रूज जिन्हें बचाने को इजरायल ने सीरिया पर बरसाए बम?
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सीरिया में रहने वाले द्रूज समुदाय के जिन लोगों को बचाने के लिए इजरायल ने हमला किया है यूं तो वे शिया इस्लाम से निकले हैं लेकिन एकेश्वरवादी होने के बावजूद वे हिन्दुओं जैसा पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं, आत्मा के कॉन्सेप्ट को मानते हैं. द्रूज समुदाय में धर्म परिवर्तन की सख्त मनाही है, एक द्रूज व्यक्ति न तो अपना मजहब बदल सकता है और न ही दूसरे धर्म का व्यक्ति द्रूज मत को अपना सकता है.
सीरिया की ताजा हिंसा ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर मध्य पूर्व की ओर खींचा है. बुधवार को इजरायल ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में विनाशकारी हमला किया. धुएं का उठता गुबार, मलबा और चीख-चिल्लाहट की तस्वीर और वीडियो ने लोगों को सन्न कर दिया. सीरिया में पिछले चार दिनों से गृह युद्ध की आग में जल रहा था. इस जंग में अबतक 350 लोगों की मौत हो चुकी है.
इजरायल ने इस हमले की वजह सीरिया के धार्मिक अल्पसंख्यक द्रूजों (Druze) की सुरक्षा बताई है. पश्चिम एशिया की राजनीति और टकराव पर नजर रखने वाले लोग भी इस नाम को बुधवार को पहली बार सुन रहे थे. इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इजरायल सीरिया के द्रूज नागरिकों को होने वाले किसी भी नुकसान रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं. क्योंकि इजरायल के द्रूज नागरिकों और सीरियाई द्रूजों के बीच गहरे संबंध हैं.
आखिर कौन हैं द्रूज? क्या है इनका इतिहास? क्यों इनकी वजह से सीरिया में हिंसा वजह हो रही है.
सीरिया में कैसे भड़की हिंसा?
13 जुलाई को द्रूज अल्पसंख्यक समुदाय के एक बिजनेसमैन के अगवा होने की खबर आते ही सीरिया के स्वैदा शहर में हिंसा भड़क उठी. इस किडनैपिंग की खबर आते ही द्रूज लड़ाकों और सुन्नी बेडौइन लड़ाकों के बीच कई दिनों तक घातक झड़पें हुईं.
15 जुलाई को इजरायल ने इस टकराव में हस्तक्षेप किया. इजरायल ने आरोप लगाया कि सीरिया की सरकारी फौज द्रूज समुदाय के लोगों का खात्मा करना चाहती है. इसे रोकने के लिए इजरायल का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया था. सीरिया की मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक पिछले रविवार से शुरू हुए इस झड़प में अबतक 350 लोगों की मौत हो चुकी है.

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