
हसीना की बनाई कोर्ट उन्हीं पर सख्त, कितनी दमदार है ढाका की घरेलू अदालत?
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बांग्लादेश में आज पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल फैसला सुनाने जा रहा है.इस कोर्ट को शेख हसीना सरकार ने ही बनाया था, जिसका मकसद था, साल 1971 में पाकिस्तान से बंटवारे के दौरान हुए नरसंहार और युद्ध अपराध पर सजा देना. अब यही ट्रिब्यूनल हसीना के खिलाफ बड़ा निर्णय लेगा.
पिछले साल अगस्त में छात्रों के विद्रोह के बाद पीएम शेख हसीना को इस्तीफा देकर बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. फिलहाल वे भारत की शरण में हैं. इस बीच ढाका स्थित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना के खिलाफ फैसला ले रहा है. कोर्ट की कार्रवाई शुरू हो चुकी और बस कुछ ही देर में स्थिति साफ हो जाएगी.
ट्रिब्यूनल को खुद हसीना सरकार ने लगभग डेढ़ दशक पहले बनाया था ताकि साल 1971 में पाकिस्तान से बंटवारे के समय हुए युद्ध अपराधों पर सुनवाई हो सके. तब से इसने कई बड़े नेताओं के खिलाफ फैसले लिए. कई बार एजेंसी पर राजनीतिक दुश्मनी भुनाने के लिए सत्ता का हथियार बनने का भी आरोप लगा. अब ट्रिब्यूनल अपने संस्थापक यानी हसीना के खिलाफ निर्णय ले सकता है.
अभी की स्थिति क्या है
लगभग डेढ़ साल पहले बांग्लादेश में सत्तापलट हुआ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में उम्मीद थी कि देश स्थिर हो सकेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब एक बार फिर ढाका में विस्फोट हो रहे हैं. लोग नाराज हैं. दरअसल, हसीना सरकार के समर्थकों को डर है कि आईसीटी उनकी नेता के खिलाफ बेहद कड़ा फैसला न ले ले. बगावत पहले की तरह सत्ता को न लील ले, इसके लिए यूनुस सरकार ने हलचल देखते ही गोली मारने के आदेश दे रखे हैं.
जिस आईसीटी को खुद हसीना ने बनाया था, वही उनके खिलाफ दिख रहा है. यहां कई सवाल हैं.
- पूर्व पीएम पर क्या आरोप हैं?- ट्रिब्यूनल कितना शक्तिशाली है, जो उनपर लगे आरोपों की सुनवाई कर रहा?- क्या उसने किसी और बड़े लीडर के खिलाफ भी सुनवाई की और फैसले दिए?- क्यों इस संस्थान पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगते रहे?

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