
सरकारी जमीन पर 41 इमारतों का अवैध निर्माण और ED का एक्शन... तलाशी में 33 करोड़ कैश और हीरे बरामद
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ED ने मीरा भयंदर पुलिस आयुक्तालय द्वारा बिल्डरों, स्थानीय गुंडों और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की. यह मामला 2009 से वसई विरार नगर निगम (VVMC) के अधिकार क्षेत्र के तहत 'सरकारी और निजी भूमि पर आवासीय सह वाणिज्यिक भवनों के अवैध निर्माण' से संबंधित है.
मुंबई महानगर क्षेत्र के वसई विरार शहर में 41 अवैध इमारतों के निर्माण से संबंधित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुंबई जोन 2 की टीम ने 14 मई और 15 मई को तलाशी ली. जिसमें लगभग 33 करोड़ की नकदी, हीरे, बुलियन बरामद हुए और साथ ही आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए.
13 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन मुंबई जोनल ऑफिस-II ने 14 मई और 15 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत मुंबई और हैदराबाद में 13 अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया. तलाशी अभियान में लगभग 9.04 करोड़ रुपये की नकदी और 23.25 करोड़ रुपये के हीरे जड़ित आभूषण और बुलियन और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए.
बिल्डरों, स्थानीय गुंडों और अधिकारियों का गठजोड़ ED ने मीरा भयंदर पुलिस आयुक्तालय द्वारा बिल्डरों, स्थानीय गुंडों और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की. यह मामला 2009 से वसई विरार नगर निगम (VVMC) के अधिकार क्षेत्र के तहत 'सरकारी और निजी भूमि पर आवासीय सह वाणिज्यिक भवनों के अवैध निर्माण' से संबंधित है. समय के साथ, वसई विरार शहर की स्वीकृत विकास योजना के अनुसार 'सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट' और 'डंपिंग ग्राउंड' के लिए आरक्षित भूमि पर 41 अवैध इमारतों का निर्माण किया गया.
आम जनता को दिया धोखा आरोपी बिल्डरों और डेवलपर्स ने ऐसी भूमि पर अवैध इमारतों का निर्माण करके और बाद में उन्हें (आम जनता को) मंजूरी के फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेचकर आम जनता को धोखा दिया है. यहां तक कि पहले से पता था कि ये इमारतें अनधिकृत थीं और अंततः ध्वस्त कर दी जाएंगी, डेवलपर्स ने इन इमारतों में कमरे बेचकर लोगों को गुमराह किया और इस तरह गंभीर धोखाधड़ी की.
HC ने पिछले साल दिया था ध्वस्तीकरण का आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश दिनांक 8.07.2024 के माध्यम से सभी 41 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था. इसके बाद, 41 अवैध इमारतों में रहने वाले परिवारों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक एसएलपी दायर की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था. इस साल की शुरुआत में 20 फरवरी को वीवीएमसी द्वारा सभी 41 इमारतों को ध्वस्त करने का काम पूरा किया गया था.
अधिकारियों की मिलीभगत ईडी की जांच में पता चला है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण 2009 से चल रहा है. यह पाया गया है कि वसई विरार नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर घोटाले के मुख्य अपराधी सीताराम गुप्ता, अरुण गुप्ता और अन्य हैं. जांच के दौरान यह भी पाया गया है कि इन अनधिकृत और अवैध इमारतों का निर्माण विभिन्न वीवीएमसी अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया था.

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