
लंदन के बाद अब न्यूयॉर्क में मुस्लिम मेयर होने से क्या बदलेगा? जानें- जोहरान ममदानी की जीत का भारत में इतना जश्न क्यों मना
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अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में दक्षिण एशियाई मूल के मुस्लिम नेता जोहरान ममदानी मेयर बने हैं. भारत में उनकी जीत पर सोशल मीडिया पर जश्न देखा गया. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जश्न लोकतंत्र की जीत के नाम पर है या उनकी राजनीतिक और धार्मिक पहचान के कारण. ममदानी के भारत से जुड़े बयानों और उनके चुनाव प्रचार के तरीके पर भी चर्चा हो रही है.
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुए मेयर चुनावों में जोहरान ममदानी ने जीत दर्ज कर इतिहास बना दिया है. यह पहली बार है जब दक्षिण एशियाई मूल के एक मुस्लिम नेता ने न्यूयॉर्क जैसा बड़ा और प्रभावशाली शहर जीत लिया. लेकिन भारत में उनकी जीत की चर्चा केवल राजनीतिक नहीं है. सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग इसे लोकतंत्र की जीत बता रहा है और जश्न मना रहा है. वहीं सवाल भी उठ रहे हैं कि इस खुशी के पीछे असल कारण क्या है.
कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह जश्न इसलिए है क्योंकि एक भारतीय मूल का नेता जीता है या फिर इसलिए क्योंकि वह खुद को इंडियन मुस्लिम पहचान के साथ जोड़ते हैं और भारत की कुछ नीतियों का सार्वजनिक विरोध करते हैं. भारत में कुछ लोगों ने उनकी जीत को कट्टरवाद के सामने लोकतंत्र की जीत बताया. वहीं एक वर्ग ने इसे मोदी विरोध की राजनीति से जोड़कर देखा.
जोहरान ममदानी की जीत पर भारत में जश्न
जोहरान ममदानी ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्हें 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले. यह भी दिलचस्प है कि 1969 के बाद पहली बार किसी उम्मीदवार को न्यूयॉर्क में 10 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं. इस जीत के दौरान उन्होंने अपनी पहचान और समुदाय को मुख्य मुद्दा बनाया. अपनी रैलियों में उन्होंने बॉलीवुड के गानों, संवादों और अपनी भारतीय मुस्लिम पहचान का बार-बार उल्लेख किया.
न्यूयॉर्क में चुनाव प्रचार के दौरान ममदानी ने पैगाम्बरी अंदाज में राजनीतिक संदेश दिए. उन्होंने टैक्सी ड्राइवरों को कम ब्याज पर लोन देने, किराये कम कराने, सस्ते ग्रोसरी स्टोर खोलने और नौकरीपेशा लोगों के लिए मुफ्त बस सेवा जैसी वादे किए. यानी मुफ्त सेवाओं की राजनीति भी उनकी रणनीति का बड़ा हिस्सा रही.
न्यूयॉर्क में 10 लाख से ज्यादा वोट मिले

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