
रूस से सस्ता तेल खरीद भारत की रिफाइनरी कंपनियों को हुआ इतना मुनाफा
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यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से ही भारत रियायाती कीमतों पर रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है. भारत सरकार की ओर से जारी डेटा का विश्लेषण करने से पता चलता है कि पिछले 14 महीनों में रूस से सस्ता तेल खरीद कर भारतीय रिफाइन कंपनियों ने बंपर बचत की है.
यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से रियायती कीमतों पर रूस से बंपर तेल खरीद रही भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अरबों डॉलर से ज्यादा की बचत की है. अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद से सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी करके भारतीय रिफाइन कंपनियों ने मई 2023 तक कम से कम 7.17 अरब डॉलर की बचत की है.
इंडियन एक्सप्रेस की यह रिपोर्ट भारत सरकार के कॉमर्स मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी कॉमोडिटी वाइज और कंट्री वाइज रिपोर्ट पर आधारित है. रिपोर्ट में पिछले 14 महीने यानी मई 2023 तक के डेटा का विश्लेषण किया गया है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल की खपत करने वाला और आयात करने वाला देश है. भारत अपनी 85 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर करता है. यूक्रेन से युद्ध के कारण यूरोपीय देश रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं. आर्थिक प्रतिबंधों से उबरने के लिए रूस भारत को रियायती कीमतों पर कच्चा तेल निर्यात कर रहा है.
रियायती कीमतों का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियां बंपर तेल आयात कर रही हैं. इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि जो भारत के लिए कभी मामूली तेल निर्यातक था, आज भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश बन गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के ट्रेड डेटा विश्लेषण से यह पता चलता है कि अप्रैल 2022 से मई 2023 तक यानी 14 महीने में भारत ने कुल 186.45 अरब डॉलर का तेल आयात किया. अगर रूसी कच्चे तेल का भुगतान भी अन्य आपूर्तिकर्ता देशों को की गई औसत कीमत पर किया जाता तो भारत का तेल आयात बिल 193.62 अरब डॉलर का होता.
भारतीय तेल रिफाइन कंपनियों को हुई 7 अरब डॉलर की बचत

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