
रूस ने यूक्रेन में मचाई तबाही तो भारत की आई प्रतिक्रिया, कहा- आम लोगों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं
AajTak
रूस और यूक्रेन में छिड़ी जंग में बेशक भारत किसी भी एक पक्ष का साथ नहीं दे रहा है, लेकिन जिस पक्ष की किसी बात पर कोई आपत्ति होती है तो भारत कहने से पीछे नहीं हटता है. दरअसल, सोमवार को रूस ने यूक्रेन पर पूरी ताकत के साथ मिसाइल अटैक किया, जिसमें यूक्रेन के कई शहरों में तबाही मच गई. अब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मामले में बड़ा बयान दिया है.
रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत ने हमेशा अपना पक्ष साफ रखा है. दोनों ही देशों को भारत ने हमेशा शांति के साथ वार्ता का सुझाव दिया है. लेकिन हाल ही में रूस की ओर यूक्रेन पर किए गए मिसाइल अटैक को लेकर भारत ने प्रतिक्रिया दी है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर यूक्रेन पर रूसी मिसाइल अटैक को लेकर कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना और आम नागरिकों की मौत का कारण बनाना स्वीकार करने लायक नहीं है.
एस जयशंकर ने कहा कि इस संघर्ष से किसी का भी भला नहीं हो रहा है. उन्होंने आगे कहा कि यह संघर्ष दुनिया के एक बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा रहा है, क्योंकि इसकी वजह से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बहुत ही गलत तरह से असर पड़ रहा है. विदेश मंत्री ने एक बार फिर कहा कि रूस और यूक्रेन विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक और वार्ता के रास्ते पर लौटना होगा.
रूस ने हमले से दहलाया
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने यह बयान ऑस्ट्रेलिया के लोवी इंस्टीट्यूट में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया. यूक्रेन पर रूस के जिस हमले के बाद जयशंकर का यह बयान आया है, उस हमले ने पूरी दुनिया को अचानक हिला दिया.
खास बात है कि इससे पहले अभी तक रूस की ओर से यूक्रेन पर इतना घातक हमला नहीं किया गया था. लेकिन सोमवार को अचानक रूस की ओर से यूक्रेन पर भारी संख्या में मिसाइल अटैक कर दिया गया, जिससे यूक्रेन में 11 लोगों की मौत हो गई और काफी संख्या में लोग घायल भी हो गए. इसके साथ ही मिसाइलों के लगातार अटैक से यूक्रेन के कई बड़े शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को भी काफी पहुंचा है.
ऑस्ट्रेलिया और भारत के संबंधों पर बोले जयशंकर

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.









