
भारत का ताइवान के साथ तीन दशक पुराना रिश्ता, जानिए फिर भी अब तक क्यों नहीं डिप्लोमैटिक रिलेशन?
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भारत औऱ चीन के बीच हाल के सालों में रिश्तों में तनाव आया है. इसी बीच भारत ने ताइवान के साथ अपने संबंधों को निभाने की कोशिश की है. 2020 में गलवान में हुए विवाद के बाद भारत ने विदेश मंत्रालय में तत्कालीन संयुक्त सचिव (अमेरिका) गौरांगलाल दास को ताइवान में राजनयिक नियुक्त किया.
अमेरिका की स्पीकर नैंसी पेलोसी मंगलवार को ताइवान के दौरे पर पहुंचीं. नैंसी पेलोसी के इस दौरे पर चीन भड़क गया है. माना जा रहा है कि अमेरिकी स्पीकर पेलोसी का ये दौरा अमेरिका और चीन के बीच तनाव को बढ़ा सकते हैं. वहीं, इस पूरे मामले पर भारत अपनी नजर बनाए हुए है, हालांकि, उसकी ओर से अभी तक इस मामले में कोई बयान नहीं आया है.
भारत ने अभी तक ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक रिश्ते नहीं बनाए हैं, क्योंकि यह चीन की वन चाइना पॉलिसी का समर्थन करता है. हालांकि, दिसंबर 2010 में तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के दौरान, नई दिल्ली ने संयुक्त बयान में चीन की वन चाइना पॉलिसी के समर्थन का जिक्र नहीं किया था.
क्या है भारत की ताइवान पर नीति?
भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में संसद में बताया था कि उसके ताइवान के साथ कैसे रिश्ते हैं? राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने बताया था कि ताइवान पर भारत की नीति स्पष्ट और सुसंगत है और यह व्यापार, निवेश और पर्यटन के क्षेत्रों में बातचीत को बढ़ावा देने पर केंद्रित है.
उन्होंने बताया था कि सरकार व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और इस तरह के अन्य क्षेत्रों और लोगों से लोगों के संबंध के क्षेत्रों में बातचीत को बढ़ावा देती है.
क्या ताइवान के साथ नजदीकी बढ़ा रहा भारत?

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