
भारतीयों से भीख नहीं मांगेंगे, अंतिम सांस तक लड़ेंगे, उम्रकैद पर बोलीं यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी
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यासीन मलिक को बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. उसकी सजा को लेकर पाकिस्तान की रहने वाली उसकी पत्नी मुशाल मलिक ने भारतीय कोर्ट और अधिकारियों पर बेबुनियाद आरोप लगाए हैं. मुशान मलिक ने कहा है कि अब ये मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया जाना चाहिए.
बुधवार को NIA की एक अदालत ने कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई. मलिक को दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा और 10 अन्य मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई गई. उस पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया. मलिक की सजा की पाकिस्तान में काफी चर्चा रही और उसके दोषी साबित होने के बाद से ही पाकिस्तान से सभी हलकों से उसके समर्थन में आवाजें उठ रही हैं. मलिक की पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक भी लगातार इस मामले को लेकर ट्विटर पर सक्रिय हैं.
पति को सजा होने के बाद से मुशाल ने कई ट्वीट किए हैं और कई अनर्गल आरोप लगाए हैं.
मलिक को सजा होने के बाद मुशाल ने जो पहला ट्वीट किया उसमें उन्होंने लिखा, 'अदालत ने मेरे यासीन को उम्र कैद की सजा देने का फैसला किया है. अदालत लोगों को खुश करने के लिए फैसला ले सकती है, भले ही आरोपी के खिलाफ कोई सबूत न हो. और भारत में भी ऐसा ही हुआ है, उनसे और कुछ की उम्मीद नहीं की जा सकती.'
अपने ट्वीट में मुशाल ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन को टैग करते हुए आगे लिखा, 'पाखंडी और बर्बर भारतीय अधिकारियों ने अदालत के फैसले को प्रभावित किया है. मुझे इसमें कोई शक नहीं है. तो अब देखना है कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन मेरे और मेरे परिवार के साथ किस तरह से न्याय करते हैं.'
मुशाल का कहना है कि वो जो चाहे फैसला सुना सकते हैं लेकिन हम आजादी के लिए लड़ते रहेंगे. उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'वे मनचाहे फैसले कर सकते हैं. उनके फैसले हमारी आजादी, आजादी की हमारी मांग के लिए हमें लड़ने से नहीं रोक सकते. मैं इस लड़ाई को अंतिम सांस तक जारी रखूंगी और फिर मेरी बेटी इस लड़ाई को जारी रखेगी. हम पीढ़ियों तक लड़ेंगे जब तक हमें हमारे अधिकार नहीं मिल जाते.'
यासीन मलिक के साथ अपनी एक तस्वीर ट्वीट करते हुए मुशाल ने लिखा, 'हम कभी हार नहीं मानेंगे और न ही हारेंगे. यासीन मलिक उस धरती का बेटा है. हर कश्मीरी और पाकिस्तानी यासीन मलिक की रिहाई के लिए तब तक आवाज उठाए जब तक आसमान न हिल जाए. हमारे नेता भारतीयों से अपने जान की भीख कभी नहीं मागेंगे और न ही आत्मसमर्पण करेंगे. आजादी के लिए हमारा संघर्ष अंतिम सांस तक चलता रहेगा.

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