
ब्राजील में बोलसोनारो समर्थकों के हंगामे पर राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा का एक्शन, सेना प्रमुख को किया बर्खास्त
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ब्राजील में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के समर्थकों द्वारा हंगामा किए जाने पर बड़ा एक्शन लिया गया है. राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने देश के सेना प्रमुख को बर्खास्त कर दिया है. राष्ट्रपति ने जनरल टॉमस मिगुएल रिबेरो पाइवा को सेना की कमान सौंपी है.
ब्राजील में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के समर्थकों द्वारा सरकारी इमारतों को कब्जा में लेने के मामले में राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने सेना प्रमुख जनरल जूलियो सीजर डी अरुडा को बर्खास्त कर दिया है. हालांकि सेना प्रमुख को हटाने को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि अरुडा को सेना प्रमुख के पद से हटा दिया गया है.
राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने अरुडा की जगह जनरल टॉमस मिगुएल रिबेरो पाइवा को सेना की कमान सौंपी है. टॉमस इससे पहले साउथ-ईस्ट सैन्य कमान के प्रमुख थे. बीती 8 जनवरी को बोलसोनारो के समर्थकों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और ब्राजाली की सुप्रीम कोर्ट पर धावा बोल दिया था. दंगाइयों ने राष्ट्रपति चुनाव में बोलसोनारो की हार को पलटने के लिए सेना से हस्तक्षेप करने की अपील की थी. देश में इन दंगों के बात लूला ने कहा था कि उन्हें सशस्त्र बलों में लोगों की मिलीभगत का संदेह है.
हाल ही में ब्राजील के वामपंथी नेता ने कहा कि उनकी सरकार कट्टर बोलसोनारो के वफादारों को सुरक्षा बलों से निकाल देगी. उन्होंने अशांति के बाद अपने सुरक्षा विस्तार से कई दर्जन सैनिकों को भी हटा दिया था. ब्राजील में हुए दंगों के मामले में दो हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने अशांति फैलाने वालों की जांच में बोलसोनारो को भी शामिल करने का अधिकार दिया है. बोलसनारो एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी थे. उन्होंने अपने पूरे राष्ट्रपति काल में सशस्त्र बलों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे.
'सैनिकों को नागरिकों के रूप में देना होगा जवाब'
अरुडा ने शुक्रवार को लूला के साथ एक बैठक में भाग लिया था, जिसमें नौसेना और वायुसेना के कमांडरों के साथ रक्षामंत्री जोस मुसियो मोंटेइरो भी शामिल थे. रक्षामंत्री ने बैठक के बाद कहा था कि देश के सशस्त्र बलों का दंगों में कोई सीधा हाथ नहीं था, लेकिन इसमें शामिल किसी भी सैन्य कर्मियों को "नागरिकों के रूप में जवाब" देना होगा.
अक्टूबर महीने में हुए थे चुनाव

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