
बारूदी जमीन और खंडहर इमारतें- गाजा लौट रहे लोग क्या वाकई सुरक्षित हैं, फौरी राहत के लिए क्या बंदोबस्त?
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हमास- इजरायल युद्ध के बीच गाजा की बड़ी आबादी अपने घर छोड़कर दक्षिणी हिस्सों में विस्थापित हो गई थी. राफा और खान यूनिस को सेफ जोन बताया गया था. अब सीजफायर के बाद घर-वापसी हो रही है. लेकिन खत्म हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच जीवन कहीं ज्यादा मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जबकि, जगह-जगह अनएक्सप्लोडेड विस्फोटक पड़े होंगे.
दो साल से चल रहा इजरायल-हमास युद्ध आखिरकार खत्म हो गया. गाजा में बीते कई दिनों से सीजफायर लागू है. बमबारी से बचने के लिए सेफ जोन्स की तरफ पलायन कर गई आबादी पर अब वापस लौटने का दबाव है. हालांकि हमलों में गाजा के रिहायशी इलाकों से लेकर अस्पताल भी खंडहर हो चुके. ऐसे में क्या वापस लौटे गाजावसियों को अस्थाई राहत मिल सके, इसके लिए भी कोई इंतजाम है?
अक्टूबर 2023 में शुरू हुई लड़ाई के बीच पहले तो फोकस हमास के ठिकानों पर रहा. लेकिन फिर पता लगा कि आतंकी संगठन ठीक शहर में आबादी के साथ बसा हुआ है. इसके बाद जमीनी हमले भी होने लगे. उत्तरी गाजा में कार्रवाई के बीच लाखों लोग दक्षिण की तरफ पलायन कर गए क्योंकि वहां सेफ जोन बनाए गए थे.
- खान यूनिस दक्षिण का सबसे बड़ा शहर है, जो विस्थापितों का बड़ा ठिकाना रहा. हालांकि बाद में यहां भी बमबारी हुई. - मिस्र की सीमा से सटा इलाके रफा क्रॉसिंग में काफी आबादी जमा थी. उसे उम्मीद थी कि स्थिति बिगड़ने पर मिस्र अपनी सीमाएं खोल देगा. - स्कूल, अस्पताल और पब्लिक बिल्डिंग को शरणस्थली में बदला गया, जहां पर यूएन सुविधाएं दे रहा था. - जब सारे ठिकाने भरने लगे तो लोगों ने खुले मैदानों और तटीय इलाकों में अस्थायी तंबू डालकर रहना शुरू कर दिया.
अब हालात ऐसे हैं कि पूरे गाजा की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी अपने घर गंवा चुकी. ज्यादातर लोग कई-कई बार विस्थापन झेल चुके. अब यही लोग वापस उत्तरी गाजा की तरफ लौट रहे हैं.
शुक्रवार को सीजफायर लागू होते ही हजारों लोग दक्षिण से उत्तर की तरफ चलने लगे. लोग पैदल या छोटे वाहनों से वापसी कर रहे हैं. अनुमान है कि तब से इतने ही दिनों में दो लाख से ज्यादा लोग वापस लौट चुके. हालांकि वहां स्थिति ऐसी नहीं कि गुजारा हो सके. इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं. बिजली- पानी नहीं है या है भी तो बहुत कम. अस्पताल, स्कूल जैसी सार्वजनिक जगहें खंडहर हो चुकीं.
कई खतरे अभी भी बने हुए हैं. मसलन, दो सालों की बमबारी के बीच बहुत से विस्फोटक बिना फटे पड़े होंगे. ये बड़ा जोखिम हैं. हो सकता है कि मलबे हटाते हुए या सड़क से गुजरते हुए ही लोगों के पैर इनपर पड़ जाएं और विस्फोट हो जाए. युद्ध-प्रभावित इलाकों में ऐसे मामले बहुतेरे आते हैं.

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