
बांग्लादेश ने चाही शेख हसीना की वापसी, क्या भारत राजी होगा, किस आधार पर कर सकता है मना?
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हिंसक प्रदर्शनों के बीच अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिर गई, और उन्होंने भारत में शरण ली. फिलहाल बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार है, जो देश पर हसीना को लौटाने का दबाव बना रही है. हाल में एक बार फिर वहां के विदेश मंत्रालय ने राजनयिक नोट भेजते हुए पूर्व पीएम की वापसी की मांग की. भारत के पास अब क्या विकल्प हैं?
बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है. अगस्त की शुरुआत में हिंसक प्रदर्शनों के बीच तत्कालीन पीएम शेख हसीना का तख्तापलट हो गया. हालात इतने बिगड़े कि उन्हें छिपकर भारत आना पड़ा. अब वहां अंतरिम सरकार है, जो देश की स्थिति सुधारने से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रही है कि कैसे हसीना को वापस बुलाया जाए. इसके लिए वो भारत सरकार पर लगातार राजनयिक दबाव भी बना रही है. यहां तक कि ढाका स्थित ट्रिब्यूनल ने इंटरपोल से उनकी गिरफ्तारी में भी मदद मांग डाली. जानिए, इस बीच भारत के पास क्या रास्ते बचते हैं.
फिलहाल क्या नया हुआ
यूनुस सरकार में विदेश मंत्रालय के सलाहकार डॉ तौहीद हुसैन ने 23 दिसंबर को यह मांग रखी. राजनयिक नोट भेजते हुए उन्होंने कहा कि सरकार लीगल प्रोसेस के लिए हसीना का प्रत्यर्पण चाहती है. दरअसल मौजूदा सरकार का आरोप है कि हसीना के कार्यकाल में कई लोगों पर हिंसा हुई, यहां तक कि प्रदर्शनकारियों को भी नुकसान पहुंचाया गया. हसीना और उनके लोगों के खिलाफ 60 से ज्यादा शिकायतों में नरसंहार भी शामिल है.
कथित तौर पर इसी जांच के लिए वे हसीना और अवामी लीग के कई नेताओं की गिरफ्तारी चाहती है. वो लगातार भारत से इसकी दरख्वास्त कर रही है. हाल में भेजा गया डिप्लोमेटिक मैसेज भी इसी बारे में था. लेकिन ये पूरी तरह से औपचारिक नहीं, बल्कि नोट वर्बल था, जिसपर किसी खास अधिकारी के दस्तखत नहीं. यानी ढाका की तरफ से बचते-बचाते रास्ते निकाले जा रहे हैं.
हसीना की वापसी के लिए और कौन से तरीके अपना चुका ढाका

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