
पेट में था छेद, अंदर दिखता था सारा खाना... डॉक्टर ने 10 साल तक मरीज पर किया एक्सपेरिमेंट
AajTak
कहानी ऐसे शख्स की, जिसके शरीर पर 10 सालों तक अमेरिका के डॉक्टर ने एक्सपेरिमेंट (Experiment) किया. इस एक्सपेरिमेंट का मकसद था गैस्ट्रिक सिस्टम के बारे में नई जानकारियां एकत्रित करना. लेकिन इस एक्सपेरिमेंट से शख्स की जिंदगी नरक सी हो गई. जबकि, एक्सपेरिमेंट करने वाले डॉक्टर इससे काफी मशहूर हुए. चलिए जानते हैं इस अनोखे एक्सपेरिमेंट के बारे में...
इस दुनिया में आए दिन नए-नए आविष्कार होते रहते हैं. इन आविष्कारों का मतलब होता है इंसानों की जिंदगी को आरामदायक बनाना. यूं तो वैज्ञानिक आविष्कारों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए चूहे, बंदर, अन्य जीव या इंसानी मृत शरीर पर प्रयोग करते हैं. लेकिन क्या हो जब आविष्कार के प्रयोग के लिए जिंदा मनुष्य को ही चुन लिया जाए. आज हम आपको ऐसे ही एक आविष्कार के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने पूरी दुनिया में काफी सुर्खियां बटोरी थीं.
दिन था 6 जून 1822 का. अमेरिका के आर्मी डॉक्टर विलियम बोमोंट (William Beaumont) के पास एक अनोखा केस आया. जिसमें एलेक्सिस सेंट मार्टिन (Alexis St. Martin) नामक शख्स गलती से एक शिकारी की गोली का शिकार हो गया था. BBC के मुताबिक, यह गोली अलेक्सिस के पेट में लगी थी. पेट में लगी गोली ने सीधे खाने की थैली को फाड़ दिया था. जिसके कारण एलेक्सिस द्वारा खाया खाना पेट से बाहर आ रहा था.
देखने में यह मामला काफी पेचीदा लग रहा था. डॉक्टर बोमोंट ने भी ऐसा होते हुए पहले कभी नहीं देखा था. और न ही ऐसे केस के बारे में उन्होंने पहले कभी सुना था. लेकिन फिर भी बोमोंट ने एलेक्सिस का इलाज शुरू किया. 2 महीने के इलाज के बाद एलेक्सिस की जान तो बच गई. लेकिन उनके पेट का वो जख्म जहां उन्हें गोली लगी थी, वो अब तक नहीं भरा था. वहां एक छेद सा बन गया था. डॉक्टर ने काफी कोशिश की. लेकिन वह छेद भर नहीं पा रहा था.
पेट के अंदर दिखता खाना नतीजा ये रहा कि एलेक्सिस द्वारा कुछ भी खाने के बाद खाना पेट से बाहर न निकल जाए इसलिए उस जख्म वाली जगह पर हमेशा कुछ चीज रखनी पड़ती थी. ताकि खाना पेट से बाहर न निकल जाए. हालात ये थे कि जब डॉक्टर एलेक्सिस के पेट के उस जख्म (छेद) में झांकते तो उन्हें उसके पेट के अंदर का सारा नजारा साफ नजर आता. वे अलेक्सिस द्वारा खाए खाने को पचते हुए देख पाते थे. ये इतिहास में पहली बार था जब किसी डॉक्टर ने मरीज के पेट में खाना पचता हुए नंगी आंखों से देखा था.
एलेक्सिस पर ऐसे शुरू हुआ शोध तमाम कोशिशों के बाद भी जब वो जख्म नहीं भर पाया तो डॉक्टर विलियम बोमोंट के दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न इस पर कोई शोध की जाए. अलेक्सिस वहां से जाना चाहते थे. लेकिन डॉक्टर बोमोंट ने उन्हें अपने ही घर में काम पर रख लिया. और साथ ही साथ डॉक्टर बोमोंट एलेक्सिस पर नए-नए शोध भी करने लगे. बोमोंट ने फिर गैस्ट्रिक सिस्टम पर किताब लिखना भी शुरू कर दिया. वे एलेक्सिस के पेट पर अलग-अलग तरह के एक्सपेरिमेंट करने लगे. कभी मीट का टुकड़ा तो कभी कुछ और. वे इस तरह खाने की चीजों को एलेक्सिस के पेट में डालते और उसे पचता हुआ देखते. फिर जो भी नई जानकारी मिलती, उसे अपनी किताब में लिख लिया करते.
घर वापस जाना चाहते थे एलेक्सिस बोमोंट एंजाइम्स (Enzymes) को अपनी आंखों के सामने काम करता देखते थे. उधर एलेक्सिस जान चुके थे कि ये जख्म अब कभी नहीं भरने वाला. और डॉक्टर बोमोंट ने उन्हें सिर्फ एक्सपेरिमेंट करने के लिए अपने पास रखा हुआ है. वह अब वहां से जाना चाहते थे. क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनके शरीर पर अब कोई और शोध हो. बता दें, उस समय डॉक्टर्स और पेशेंट के बीच किसी तरह का कोई कॉन्ट्रेक्ट भी नहीं होता था. उनके शरीर पर शोध उनकी इच्छा से हो रहे हैं या नहीं, इसके लिए भी कोई नियम नहीं था.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








