
पुणे में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से हड़कंप... 5 महीने में 21 केस, 9.21 करोड़ की ठगी, हाई-प्रोफाइल प्रोफेशनल्स बने शिकार
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पुणे में जनवरी से मई 2025 के बीच 21 डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड केस सामने आए, जिनमें 9.21 करोड़ रुपये की ठगी हुई. पीड़ितों में शिक्षक, इंजीनियर, IT प्रोफेशनल तक शामिल हैं. आरोपी खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देते हैं. पुलिस ने साइबर टीम बनाई है और 1930 हेल्पलाइन शुरू की है.
पुणे में एक बार फिर साइबर ठगों ने सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती दे दी है. जनवरी 2025 से मई 2025 के बीच 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' के 21 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुल मिलाकर 9.21 करोड़ रुपये की ठगी की गई है. इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुणे पुलिस ने एक विशेष साइबर टीम का गठन किया है. इस स्कैम में खास बात यह है कि आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर, प्रोफेसर और शिक्षकों जैसे पढ़े-लिखे लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं.
क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम?
इस स्कैम में साइबर अपराधी खुद को CBI, पुलिस या अन्य एजेंसियों के अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल करते हैं. वे पीड़ित को बताते हैं कि उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, सिम कार्ड दुरुपयोग या अन्य अपराधों में शामिल होने का आरोप है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है. डर और भ्रम की स्थिति में लोग घबरा कर उनकी बातों में आ जाते हैं. फिर उन्हें पैसों का ट्रांजेक्शन करने के लिए मजबूर किया जाता है.
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हाई-प्रोफाइल ठगी के मामले
एक बड़ा मामला तब सामने आया जब मुंबई के एक व्यापारी से 6.3 करोड़ रुपये ठग लिए गए. ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर व्यापारी को डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया और मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसा दिया. जांच के बाद पुणे साइबर पुलिस ने 28 वर्षीय तुषार हरीशचंद्र वजानत्री को गिरफ्तार किया. वह म्यूल अकाउंट (धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाला बैंक खाता) संचालित कर रहा था. दिलचस्प बात यह है कि उसकी पत्नी उस गांव की चुनी हुई सरपंच है.

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