
पाखंडी बाबा बने जयदीप, घटाया था 30 किलो वजन, बोले- 6 महीने भारी पड़े
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साहित्य आजतक 2025 में जयदीप अहलावत ने अपनी नेटफ्लिक्स फिल्म 'महाराज' के लगभग 30 किलो वजन घटाया था. ये फिल्म बीते जमाने के जाने माने पत्रकार रहे करसनदास मुलजी पर आधारित थी. जयदीप फिल्म के विलेन जादूनाथ बने थे महाराज बने थे. जादूनाथ एक पाखंडी बाबा था, जो महिलाओं का शोषण करता है.
साहित्य आजतक 2025 दिल्ली में 23 नवंबर तक चला. इवेंट के आखिरी दिन ओटीटी स्टार और बॉलीवुड फिल्मों के जाने माने एक्टर जयदीप अहलावत ने अपने करियर, बचपन, एक्टिंग में कदम रखने और किरदारों के लिए मेहनत पर बात की. जयदीप ने बताया कि वे अपने किरदारों में कैसे घुसते हैं. एक्टर ने कहा कि किसी किरदार को पढ़ते हुए उसका भाव समझने पर ही आप प्रोजेक्ट को करने का फैसला करते हैं. जिम्मेदारी ये है कि आप उस भाव को जो कहानी में है या किरदार में है, ऑडियंस तक पहुंचाएं.
इसके अलावा जयदीप अहलावत ने फिल्मों के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन पर भी बात की. एक्टर ने बताया कि उन्होंने अपनी नेटफ्लिक्स फिल्म 'महाराज' के लगभग 30 किलो वजन घटाया था. ये फिल्म बीते जमाने के जाने माने पत्रकार रहे करसनदास मुलजी पर आधारित थी. इसमें आमिर खान के बेटे जुनैद ने करसनदास का रोल निभाया था. वहीं जयदीप फिल्म के विलेन जादूनाथ बने थे महाराज बने थे. जादूनाथ एक पाखंडी बाबा था, जो महिलाओं का शोषण करता है.
जयदीप ने घटाया था वजन
अपने किरदार के लिए ट्रांसफॉर्मेशन पर जयदीप अहलावत ने कहा, 'महाराज असल में हमारे लॉकडाउन के बाद की पहली फिल्म है. जनवरी में मेरी लास्ट फिल्म आई थी. बागी में मैं था और बागी की रिलीज के एक हफ्ते बाद लॉकडाउन लगा. फिर पाताल लोक आया, तो घर पर पड़े थे. 7-8 महीने कहीं जा नहीं पाए. और भगवान की दया से घर में खाना पीना ठीक ठाक था, घी-दूध चल रहा था. तो वजन बढ़ गया. मैं 110 किलो का था, 109. 7 (किलो) आज भी याद है मुझे, जिस दिन मैंने ट्रेनिंग शुरू की. 83 तक पहुंचा.'
उन्होंने आगे कहा, 'उस किरदार के लिए डायरेक्टर के दिमाग में जो सोच थी, वो सफल हो रही थी. वो इंसान का जैसा भी मानसिक (विचार) है, वो दिखने में उससे विपरीत है. दिमाग विभत्स हो सकता है, दिखने में विभत्स नहीं है. तो वो जो सोच थी, वो उनको चाहिए था. पर वो 6 महीने मेरे लिए बहुत भारी पड़े गए उस चक्कर में. 30 किलो वजन लगभग घटाना...'
जयदीप अंत में बोले, 'मैंने एक भी दिन शायद ऐसा नहीं होगा, जो उन्होंने मुझे कुछ खाने को दिया और मैंने मना किया हो. बस वही खाता था, जो वो मुझे असल में देते थे, जो ट्रेनर थे हमारे. मुझे नहीं पता क्या बनता है, कैसे बनता है, कितना है. पर वो मुट्ठी भर होता था और तीन मे तीन टाइम ट्रेनिंग होती थी. वो 6 महीने लगे, बहुत-बहुत भारी थे. बीच बीच में लगा कि छोड़ो इसी वजन में कर लेंगे. एक्टिंग की तो करनी है वजन का देखा जाएगा.'













