
पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने ईरान-अफगानिस्तान को दी धमकी, भारत से रिश्तों पर कही ये बात
AajTak
असीम मुनीर का ये बयान ऐसे वक्त आया है, जब पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव अब तक के सबसे बुरे दौर में हैं. दोनों के बीच ये तनाव तब शुरू हुआ, जब ईरान ने पाकिस्तान में बलूचिस्तान में जैश अल-अद्ल के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के ठिकानों पर हवाई हमले कर दिए थे. जैश अल-अद्ल को ईरान और बीएलए को पाकिस्तान आतंकी संगठन मानते हैं.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने ईरान को करारा जवाब देने की धमकी दी. जनरल मुनीर ने कहा कि जिन लोगों ने हमारे देश की पीठ पर छुरा घोंपा है, उन्हें करारा जवाब दिया जाएगा.
असीम मुनीर का ये बयान ऐसे वक्त आया है, जब पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव अब तक के सबसे बुरे दौर में हैं. दोनों के बीच ये तनाव तब शुरू हुआ, जब ईरान ने पाकिस्तान में बलूचिस्तान में जैश अल-अद्ल के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के ठिकानों पर हवाई हमले कर दिए थे. जैश अल-अद्ल को ईरान और बीएलए को पाकिस्तान आतंकी संगठन मानते हैं.
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया है कि मुनीर ने ये बयान बुधवार को छात्रों को संबोधित करते हुए दिया. उन्होंने ईरान की एयरस्ट्राइक का भी जिक्र किया. असीम मुनीर ने कहा, किसी को भी पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने आगे कहा, आप हमारी पीठ में छुरा नहीं घोंप सकते और अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको करारा जवाब मिलेगा.
अफगानिस्तान को भी दी धमकी
असीम मुनीर ने सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को भी धमकाया. मुनीर ने कहा, अफगानिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है, जिसने कभी दोस्ती नहीं निभाई. अफगानिस्तान एकमात्र देश था, जिसने आजादी के बाद पाकिस्तान की संयुक्त राष्ट्र में एंट्री का विरोध किया था.
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को चेताते हुए मुनीर ने कहा, पाकिस्तान की ओर मत देखो. हम कुछ भी और सबकुछ कुर्बान करने को तैयार हैं. जब हर एक पाकिस्तान की सुरक्षा की बात आती है, तो पूरे अफगानिस्तान को नुकसान पहुंचाया जा सकता है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीतियां विवादों में हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तुलना हिटलर की तानाशाही से की जा रही है. वेनेज़ुएला पर हमला करने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के बाद अमेरिका ने यूरोप के आठ NATO देशों पर टैरिफ लगाया है.







