
'धोखा दोगे तो गला घोंट दूंगा...', कौन है पुतिन का दोस्त जिसे कहा जाता है यूरोप का आखिरी तानाशाह
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अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने सातवीं बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली है. वो 1994 से बेलारूस की सत्ता में हैं. लुकाशेंको को सत्ता में बने रहने में राष्ट्रपति पुतिन की मदद मिलती रही है. पश्चिमी देश उन्हें 'यूरोप का आखिरी तानाशाह' भी कहते हैं.
'यूरोप का अंतिम तानाशाह' के नाम से मशहूर और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने मंगलवार को अपने सातवें कार्यकाल के लिए शपथ ली. इसके साथ ही उन्होंने उन लोगों, खासकर पश्चिमी देशों का मजाक उड़ाया जो उन्हें तानाशाह कहते हैं. लुकाशेंको ने कहा कि उनके देश में उन लोगों की तुलना में अधिक लोकतंत्र है, जो खुद को लोकतंत्र का मॉडल मानते हैं.
70 साल के लुकाशेंको ने राजधानी मिंस्क स्थित राष्ट्रपति भवन Independence Palace में अपने उद्घाटन भाषण में पश्चिमी देशों पर व्यंगात्मक टिप्पणी करते हुए कहा, 'आधी दुनिया हमारी 'तानाशाही', हमारे लोगों की संपन्नता और हितों की तानाशाही का सपना देख रही है.'
लुकाशेंको ने पिछले साल सत्ता में तीन दशक पूरे किए और उनके राजनीतिक विरोधियों ने 26 जनवरी को हुए चुनाव को एक तमाशा करार दिया. बेलारूस के केंद्रीय चुनाव आयोग ने घोषणा की कि उन्होंने लगभग 87 प्रतिशत वोटों के साथ जीत हासिल की है. चुनाव में उनके खिलाफ चार प्रतीकात्मक राष्ट्रपति उम्मीदवार खड़े थे जो लुकाशेंको को वफादार माने जाते हैं और जिन्होंने उनके शासन की प्रशंसा की है.
2020 में लुकाशेंको के खिलाफ हुए थे विरोध प्रदर्शन
बेलारूस के राष्ट्रपति ने विपक्ष के लगभग सभी नेताओं को जेल में डाल दिया है या वो विदेशों में निर्वासन में रह रहे हैं. 2020 में जब लुकाशेंको ने राष्ट्रपति का चुनाव जीता था तब लगभग 90 लाख लोगों ने कई महीनों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था जिसे क्रूरता से दबा दिया गया. 65,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, हजारों लोगों को पुलिस ने पीटा, स्वतंत्र मीडिया आउटलेट और एनजीओ को बंद कर दिया गया और उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया. लुकाशेंको के इस कदम की पश्चिमी देशों ने काफी आलोचना की और बेलारूस पर कई प्रतिबंध लगाए.
लुकाशेंको ने अपने आलोचकों को बताया विदेशी गुलाम

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