
'धड़क-2' को सेंसर बोर्ड से मिला झटका, दर्जन भर सीन्स पर चली कैंची, मिला U/A सर्टिफिकेट
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शाजिया इकबाल के डायरेक्शन में बनी धड़क-2 को आखिरकार 16 कट के बाद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से U/A सर्टिफिकेट मिल गया है. सेंसर बोर्ड ने फिल्म धड़क-2 में बहुत सारे बदलाव करवाएं हैं, जिसमें कई पॉलिटिकल डायलॉग, कुछ जाति सूचक शब्द है.
करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'होमबाउंड' की 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई. यहां फिल्म की काफी सराहना हुई और स्टैंडिंग ओवेशन मिला. वहीं दूसरी ओर धर्मा प्रोडक्शन की एक फिल्म को अपने ही देश में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. शाजिया इकबाल के डायरेक्शन में बनी धड़क-2 को आखिरकार 16 कट के बाद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से U/A सर्टिफिकेट मिल गया है.
फिल्म में 11 बदलाव
हालांकि सर्टिफिकेट मिलने से पहले सेंसर बोर्ड ने फिल्म धड़क-2 में बहुत सारे बदलाव करवाएं हैं. जिसमें कई पॉलिटिकल डायलॉग, कुछ जाति सूचक शब्द है. कुछ सीन्स को भी चेंज करने के लिए मेकर्स से कहा गया है. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म में क्या-क्या बदलाव करवाए गए हैं, आइए जानते हैं.
1. डायलॉग- '3,000 साल का बैकलॉग सिर्फ 70 साल में पूरा नहीं होगा.' बदला गया- इतने सालों का बैकलॉग सिर्फ 70 सालों में पूरा नहीं हो सकता...'. बता दें कि हाल ही में रिलीज हुई 'फुले' पर भी इस डायलॉग को बदला गया था. उसमें भी '3000 साल पुरानी गुलामी' को 'कई साल पुरानी' किया गया था.
2. डायलॉग- निलेश, ये कलम देख रहे हो, वे दुनिया पर राज कर रहे हैं. (बता दें कि ये संवाद बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की उस लोकप्रिय उपमा का जिक्र है जिसमें ऊंची जाति को कलम की निब कहा गया है.) बदला गया- इसे 'ये छोटा सा ढक्कन पूरी कलम का थोड़ा सा हिस्सा है और बाकी के हैं हम...' से बदला गया है.
3. जातिसूचक शब्दों को म्यूट कर दिया गया है. उनकी जगह जंगली जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है.













