
'थोड़ा-सा पेन... उसके आगे बहुत गेन', ईरान युद्ध में आर-पार के मूड में अमेरिका!
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात राष्ट्र को संबोधित करते हुए ईरान के खिलाफ जंग जारी रखने का साफ संकेत दिया है. ट्रंप ने इसे 'थोड़े दर्द के बाद बड़े लाभ' की रणनीति बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये भाषण घरेलू जनता को शांत करने और आगामी हफ्तों में निर्णायक सैन्य कार्रवाई की जमीन तैयार करने के लिए था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात (स्थानीय समयानुसार) करीब 9 बजे व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए साफ कर दिया है कि ईरान में जारी युद्ध फिलहाल बंद नहीं होगा. ट्रंप ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि आने वाले 2 से 3 हफ्तों में अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई बड़ा और निर्णायक कदम उठा सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार, इस संबोधन का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी जनता, विशेषकर ट्रंप के 'माघा' (MAGA) समर्थक वर्ग को युद्ध की आवश्यकता समझाना और उन्हें सड़कों पर उतरने से रोकना था.
ट्रंप ने तर्क दिया कि वर्तमान में जो युद्ध से परेशानी हो रही है वो कुछ वक्त के लिए है. इसके बाद अमेरिका को बहुत फायदा होगा. ट्रंप ने अपनी इस रणनीतिक स्पीच के जरिए ये बताने की कोशिश की है कि ये सैन्य ऑपरेशन अमेरिकी हितों के लिए क्यों जरूरी हो गया था.
इजरायल से रिपोर्ट कर रहे आजतक के संवाददाता प्रणय उपाध्याय का मानना है कि ट्रंप का ये भाषण उनके 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट्स का एक संकलन था. एक नेता के तौर पर उनकी पहली प्राथमिकता घरेलू राजनीति और अपना खास वोट बैंक है. चूंकि उन्होंने पहले वादा किया था कि वो अमेरिका को नए युद्धों में नहीं झोंकेंगे, इसलिए अब वो जनता को ये विश्वास दिला रहे हैं कि इस युद्ध का बोझ उन पर नहीं पड़ेगा. उन्होंने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए जनता को भविष्य के फायदों का भरोसा दिलाया है. एक तरीके से ये ट्रंप की रणनीतिक स्पीच थी, जिसमें उन्होंने अपने लोगों को अमेरिका की रणनीति को समझाया है.
अमेरिका की रणनीति
ट्रंप के 'निर्णायक कार्रवाई' वाले बयान के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में अमेरिका ईरान की सत्ता को कमजोर करने के लिए उसके 'खर्ग आइलैंड' या मुख्य क्षेत्रों पर सीधे हमले कर सकता है. इसका उद्देश्य ईरान को घुटनों पर लाकर बातचीत की मेज तक खींचना है. दूसरी ओर, इजरायली सेना लगातार ईरान के बुनियादी ढांचे और वहां की शीर्ष लीडरशिप को निशाना बनाकर दबाव बना रही है.
ट्रंप ने खोले बातचीत के दरवाजे

आज सबसे पहले हम आपको बताएंगे कि ईरान-अमेरिका युद्ध में आज की रात भयानक कैसे हो सकती है? पूरी आशंका है कि आज अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया को बहुत बड़ा सरप्राइज दे सकते हैं. या फिर ईरान पूरी दुनिया को चौंका सकता है. इस समय ट्रंप की उंगली सरप्राइज बटन पर है, वो अभी तक अपने बयानों से लोगों को चौंका रहे हैं. हर बार उनका नया बयान लोगों के लिए एक सरप्राइज ही साबित हो रहा है. कभी वो कहते हैं कि उन्होंने ईरान को तबाह कर दिया है. कभी वो कहते हैं कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह खुला है. कभी वो कहते हैं कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज नहीं खोला तो ईरान को पाषाण युग में भेज देंगे. कभी वो कहते हैं कि ईरान से अच्छी बातचीत चल रही है, फिर वो कहते हैं कि ईरान सीजफायर के लिए गिड़गिड़ा रहा है. फिर अचानक से कहते हैं कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुले या बंद रहे अमेरिका इस युद्ध से बाहर हो जाएगा. एकदम से वो NATO और यूरोप के देशों पर भड़क जाते हैं. और कहते हैं कि NATO किसी काम का नहीं है, अमेरिका इससे अलग होने पर विचार करेगा.

ट्रंप जो पल में तोला, पल में माशा वाले बयान देते आ रहे हैं. सब जानना चाहते हैं कि जल्द ही ईरान से बाहर निकलने की बात करने वाले ट्रंप क्या वाकई युद्ध से बाहर निकलेंगे. वो क्या बोलेंगे. युद्ध खत्म करने को लेकर बोलेंगे? क्या युद्ध जल्द खत्म करने की डेडलाइन देंगे? क्या बताएंगे कि वो युद्ध से किस शर्त पर बाहर निकलेंगे? क्या ट्रंप का बयान उनका झुकना माना जाएगा? क्या ट्रंप ईरान की बात मान लेंगे?

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस महायुद्ध में फिर दोहराया है कि 'हम बहुत जल्द ईरान से बाहर निकल जाएंगे,' लेकिन ट्रंप ने समय-सीमा नहीं बताई है. ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है. ईरान की नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर और ज्यादा समझदार है. लेकिन हम तभी विचार करेंगे जब होर्मुज स्ट्रेट सबके लिए खुला रहेगा, वरना हम बड़ा हमला करेंगे. इस बीच ईरान ने फिर दावा किया है कि उसने अमेरिका से किसी तरह की सीजफायर की मांग नहीं की है. चौथी बड़ी खबर ये है कि ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कह दिया है कि ईरान छह महीने लड़ने के लिए तैयार हैं. वहीं पांचवीं खबर NATO से जुड़ी हुई है. ट्रंप ने कहा है कि हम नाटो से निकलने के बारे में विचार कर रहे हैं. ट्रंप ने चिढ़ाते हुए कहा है कि नाटो कागजी शेर है.

ईरान ने कल कहा था कि वो खाड़ी देशों में अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों पर हमला करेगा. उसने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है बहरीन में Amazon के क्लाउड कंप्यूटिंग सेंटर को ईरानी हमले में नुकसान पहुंचा है. ईरान की तरफ से सभी खाड़ी देशों में अमेरिका की 18 बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी थी. इसके जवाब में अमेरिका ने कहा था कि वो तैयार है अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों की सुरक्षा करेगा.

दुनिया ने काउंटडाउन शुरू कर दिया है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध पर बड़ा ऐलान कर सकते हैं. भारतीय समय के मुताबिक कल सुबह साढ़े 6 बजे ट्रंप अमेरिका के लोगों के लिए राष्ट्र के नाम संदेश देंगे. ट्रंप का ये संदेश बेहद अहम हो सकता है क्योंकि उन्होंने कह दिया है कि 2 से 3 हफ्तों में ईरान युद्ध से अमेरिका निकलने वाला है. ट्रंप ने ये संकेत भी दिया है कि ईरान के साथ डील हो या नहीं हो, वो युद्ध को रोक देंगे. लेकिन क्या ट्रंप जो कह रहे हैं, वही सच होगा? बीते 1 महीनों में युद्ध पर ट्रंप ने कई बार सरप्राइज दिए हैं. क्या ईरान युद्ध से निकलने की ये टाइमलाइन भी कोई रणनीति है? सवाल ये भी है कि क्या अब ईरान युद्ध को रोकेगा? क्योंकि ईरान की चेतावनी बेहद गंभीर है.

आज का दंगल ईरान की जंग से तंग हो रही दुनिया को लेकर है. जिसमें पहले 3 बडी खबरें बता दें. पहली बड़ी खबर आ रही है कि होर्मुज के बंद होने से दुनिया में जो तेल गैस का हाहाकार मचा है उसे लेकर अब 35 देशों ने साझा कॉन्फरेंस की तैयारी कर ली है. ब्रिटेन में होने वाले इस सम्मेलन में होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का उपाय तलाशना है. एक और बडी खबर है कि बहरीन ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही को लेकर प्रस्ताव लाया है. यूएन और खाडी के देशों ने इसे समर्थन दिया है लेकिन इस प्रस्ताव को पास होने के लिए 9 वोट की जरूरत है और किसी देश का वीटो भी नहीं होना चाहिए. अगर प्रस्ताव पास होता है तो होर्मुज से जहाजों की आवाजाही निगरानी में हो सकती है. तीसरी बडी खबर है कि यूएई से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस लेकर भारत के दो जहाज आज मुंबई और न्यू मेंगलोर पहुंच चुके हैं.

होर्मुज संकट केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में नरमी दिखाई है. बहरीन का संशोधित ड्राफ्ट यह दर्शाता है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में पश्चिमी देश भी रूस-चीन की 'वीटो पावर' को नजरअंदाज नहीं कर सकते.

अमरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी समय के मुताबिक बुधवार रात 9 बजे देश को संबोधित करने वाले हैं...लेकिन इससे पहले मंगलवार की रात उन्होंने ईरान युद्ध से पीछे हटने की बात कही..ऐसे में लोगों के मन में ट्रंप के बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं...कि क्या ऐसा सच में होने वाला है..क्यों कि ट्रंप कभी भी अपने एक बयान पर कायम नहीं रहते.

अर्जेंटीना का यह फैसला अमेरिका की नीति के अनुरूप माना जा रहा है. सरकार ने IRGC पर 1994 के AMIA बम धमाके में हिज्बुल्लाह को समर्थन देने का आरोप लगाया है. इस कदम से ईरानी सैन्य संगठन पर अब वित्तीय प्रतिबंध और सख्त कार्रवाई संभव होगी. इससे पहले अर्जेंटीना मैक्सिको के एक ड्रग कार्टेल को भी आतंकी घोषित कर चुका है.




