
टैगोर के बाद सत्यजीत रे का मकान ढहाने पर विवाद, बांग्लादेश और पाकिस्तान में छूटी भारतीय संपत्तियां किस हाल में?
AajTak
शेख हसीना सरकार के जाने के बाद से बांग्लादेश वो सारे काम कर रहा है, जो भारत के खिलाफ जाते हों. रिश्ते पर एक और कील ठोंकते हुए ढाका ने ख्यात भारतीय फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे का मकान ढहाने का फैसला कर लिया. इससे पहले रवींद्रनाथ टैगोर के घर पर भी तोड़फोड़ हो चुकी.
दुश्मन देश में छूटी हुई संपत्तियों अक्सर या तो किसी और के नाम हो जाती हैं, या फिर खस्ताहाल पड़ी रहती हैं. देश के बंटवारे के साथ पाकिस्तान के हिस्से चले गए घरों-इमारतों का भी यही हाल हुआ. अब बांग्लादेश भी पाकिस्तान के साथ कदमताल करते हुए अपने यहां बची भारतीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है. हाल में ढाका प्रशासन ने मशहूर फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे के पैतृक मकान को गिराने की बात की. इसके बाद से खलबली मची हुई है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने फैसला बदलने की गुजारिश की, जिसके बाद खबर आ रही है कि फैसला फिलहाल के लिए रोक दिया गया. लेकिन सवाल ये है कि क्या बंटवारे के बाद यहां-वहां फैली ऐतिहासिक महत्व की प्रॉपर्टीज के लिए भारत का ढाका या इस्लामाबाद से कोई समझौता है, और अगर नहीं तो ऐसी संपत्ति का क्या होता है!
देश के बंटवारे के साथ अचल संपत्ति का बंट जाना या छूट जाना नई बात नहीं. भारत-पाक-बांग्लादेश ही नहीं, ऐसा दुनिया के उन सारे देशों के साथ हो चुका, जहां भी विभाजन हुआ. लेकिन उसके बाद क्या होता है? क्या देशों के बीच कोई करार भी हो सकता है, कि वे ख्यात लोगों के घरों को साझा विरासत मान सुरक्षित रखे? और क्या भारत का भी पाकिस्तान या बांग्लादेश से ऐसा कोई एग्रीमेंट है?
पहले ताजा मामला जानते चले. मैमनसिंह के हरिकिशोर रे चौधरी रोड पर सत्यजीत रे के दादा का घर है. एक सदी से भी कुछ पुराना ये मकान देखरेख की कमी से लगभग खंडहर हो चुका. साल 1989 में सरकार ने इसका मालिकाना हक लेते हुए यहां एक शिशु एकेडमी खोल दी थी. इसके बंद होने के बाद से बीते लगभग दो दशक से मकान खाली पड़ा है. धीरे-धीरे खिड़कियां-दरवाजे भी गायब होने लगे.
इस बीच स्थानीय प्रशासन ने इसे खतरनाक स्ट्रक्चर घोषित करते हुए मकान गिराने का फैसला ले लिया. अक्सर जर्जर पड़े मकानों के साथ ऐसा होता है. लेकिन ये केवल मकान नहीं, बल्कि एक पूरी याद है, जिसके तार भारत से जुड़े हैं. फैसले की भनक पड़ते ही भारतीय विदेश मंत्रालय एक्टिव हो गया. उसने कहा कि हमारी तरफ से मकान को ठीक-ठाक करने में मदद दी जाएगी, लेकिन उसे गिराया न जाए.
कुछ समय पहले बांग्लादेश में रवींद्रनाथ टैगोर के घर को भी नुकसान पहुंचाया गया था. बाद में स्थानीय प्रशासन ने कुछ गिरफ्तारियां भी की थीं, लेकिन मकान की ताजा स्थिति पर कोई अपडेट नहीं.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?










