
टूटे जबड़े की फोटो, नफरती कमेंट... भारतीयों के खिलाफ अमेरिका में हेट की हद हो गई!
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पुणे के राजेंद्र पंचाल का जबड़ा एक दुर्घटना में विकृत हो गया था. अब उनकी सर्जरी हो गई लेकिन अमेरिका में उनकी पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल कर भारतीयों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणी की जा रही है.
पश्चिमी देशों में रंगभेद (रेसिज्म) झेलना उतना ही सामान्य है, जितना कि हाई स्कूल की अंग्रेजी की क्लास में शेक्सपियर को पढ़ना. लेकिन जब आपको लगा कि नस्लवाद इससे अधिक नीचे नहीं जा सकता, तभी उसका स्तर और नीचे गिर गया- और इस बार, बात सिर्फ नस्लवाद की नहीं है, बल्कि विकलांगता का मजाक उड़ाने की भी है.
सोशल मीडिया साइट एक्स पर नस्लभेदी पोस्ट की बाढ़ सी आ गई है जिसमें पुणे के 40 वर्षीय हेल्पर राजेंद्र पंचाल की पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल भारतीयों का मजाक उड़ाने के लिए किया जा रहा है.
अमेरिका स्थित कई अकाउंट्स से पंचाल की सर्जरी से पहले वाली तस्वीरें शेयर कर भारतीयों के खिलाफ नफरती कमेंट्स की जा रही हैं. राजेंद्र पंचाल के साथ एक दुर्घटना की वजह से उनका जबड़ा विकृत हो गया था लेकिन कुछ समय पहले ही उनके जीवन की यह त्रासदी खत्म हो गई. लेकिन नस्लवादियों ने उन्हें नहीं बख्शा और अपने एजेंडे को फैलाने के लिए उनकी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.
राजेंद्र पंचाल जब सिर्फ एक साल के थे, तभी खेलते वक्त मुंह के बल गिरे और उनका जबड़ा टूट गया. चोट के कारण पंचाल के साथ TMJ ankylosis नामक दुर्लभ स्थिति पैदा हो गई, जिसमें जबड़ा खोपड़ी से जुड़ जाता है और मुंह खोलना लगभग असंभव हो जाता है.
राजेंद्र पंचाल का परिवार उनकी सर्जरी का खर्च नहीं उठा सका जिसकी वजह से उनकी सर्जरी नहीं हो पाई. 38 सालों तक पंचाल दूध, पानी और पतली खिचड़ी जैसी लिक्विड चीजों पर जीवित रहे, लगातार कुपोषण का शिकार रहे और ठोस भोजन चबा नहीं सके.
जबड़ा टूटने की वजह से उनकी बोलने की क्षमता पर भी असर हुआ. 2017 में जाकर उनकी सर्जरी हो सकी.

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