
जान पर खेलकर बचाई 5 मासूमों की जिंदगी, पर अपना बच्चा लापता... झांसी अग्निकांड के पीड़ित पिता की कहानी
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अब तक की जानकारी के अनुसार, अग्निकांड में घायल 16 बच्चों का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है. 10 बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है, वहीं एक बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया है. 7 बच्चों का प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. दो बच्चों को परिजन ले गए हैं. एक का जिला अस्पताल में इलाज हो रहा है. 6 बच्चे अपनी मां के साथ वार्ड में सुरक्षित हैं. 6 बच्चे सुरक्षित हैं लेकिन उनके मां-बाप की जानकारी नहीं है. 10 बच्चों की मौत हो चुकी है.
झांसी के रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आग लगने से 10 बच्चों की मौत हो गई. हादसे में कई बच्चे ऐसे हैं जिनके मां-बाप की जानकारी नहीं मिल पा रही. वहीं कुछ मां-बाप भी ऐसे हैं जिनको अपने बच्चों की जानकारी नहीं मिल पा रही. ऐसे ही एक पिता हैं महोबा के कुलदीप सिंह.
महोबा जिले के कबरइ इलाके के रहने वाले कुलदीप सिंह का भी बेटा मेडिकल कॉलेज में एडमिट था जिसका अब कुछ पता नहीं चल पा रहा है. 9 नवंबर को कुलदीप के बेटे का जन्म हुआ था. उसकी तबीयत खराब हुई तो झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया.
दवा लेने बाहर गए थे कुलदीप
बीती रात जब यह हादसा हुआ तो कुलदीप बच्चे की दवा लेने के लिए बाहर गए थे. पत्नी ने उन्हें वार्ड में आग लगने की सूचना दी. कुलदीप दौड़कर जब वार्ड में पहुंचे तो आग हर तरफ फैल चुकी थी. बच्चे अंदर बिलख रहे थे और हर तरफ चीख-पुकार मची हुई थी.
कुलदीप उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर बच्चों को बचाया. वार्ड में भर्ती 54 बच्चों में से 5 बच्चों को कुलदीप ने खुद बचाया लेकिन अब उनके ही बेटे का पता नहीं चल पा रहा है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि हादसे के वक्त जिनके बच्चे थे उन्होंने ही भीतर घुसकर बच्चों को बचाया.
'मैंने दूसरों के बच्चे बचाए'

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