
जंग में अब पाकिस्तान को मिलेगा सऊदी अरब का सहारा, जानें- कितनी मजबूत है इस खाड़ी देश की सेना
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पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पारस्परिक रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत किसी एक पर हमला दोनों पर अटैक माना जाएगा. इसमें परमाणु हथियारों का जिक्र भी है. जो सऊदी अऱब अब तक सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर था, पाकिस्तान के साथ नया गठजोड़ कर रहा है.
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐसा रक्षा समझौता किया है, जिसमें ये तय हुआ है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों पर हमला माना जाएगा. अब बड़ा सवाल ये है कि अगर भारत, पाकिस्तानी आतंकवादी हमले की स्थिति में दोबारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत एक्शन लेता है तो सऊदी अरब क्या करेगा?
रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते के मुताबिक, अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान की मदद करना ज़रूरी होगा. एक सऊदी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इस समझौते में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का भी जिक्र है. हालांकि अभी तक इस समझौते की पूरी शर्तें और दायरा सामने नहीं आया है.
सऊदी अरब सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर
सऊदी अरब अब तक अपनी सुरक्षा के लिए ज्यादातर अमेरिका पर निर्भर रहा है, लेकिन हाल के सालों में वह अपनी सुरक्षा रणनीति पर फिर से काम कर रहा है. पाकिस्तान के साथ किया गया यह समझौता इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है.
कौन है सऊदी अरब का दुश्मन?
बता दें कि सऊदी अरब के दो बड़े दुश्मन ईरान और इज़रायल हैं, और अपनी सुरक्षा के लिए वह अभी भी काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है. ग्लोबल फायरपावर डेटाबेस के मुताबिक 145 देशों की सूची में सऊदी अरब 24वें स्थान पर है, जबकि उसका सहयोगी पाकिस्तान 12वें नंबर पर है. वहीं अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य ताकत है.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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