
चीन में सिर्फ जीरो कोविड पॉलिसी नहीं बवाल की वजह, इन 8 वजहों से सुलगी सरकार विरोधी चिंगारी
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चीन में सड़कों पर उतरे लोग सिर्फ जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ नहीं बल्कि चीन सरकार के विरोध में खड़े हैं. ये लोग राष्ट्रपति शी जिनपिंग के गद्दी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. देश में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकने पर अमादा हैं.
बीते कुछ दिनों से चीन की सड़कें प्रदर्शनकारियों से पटी पड़ी हैं. चीन के कई छोटे-बड़े शहरों में सरकार विरोधी चिंगारी भड़क रही है. आलम यह है कि चीन के समर्थन में ये प्रदर्शन अमेरिका और यूरोपीय देशों तक फैल गए हैं. लेकिन इन प्रदर्शनों की एकमात्र वजह चीन की विवादित जीरो कोविड पॉलिसी नहीं है. चीन में बीते कुछ महीनों से ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने लोगों के बीच गहरा असंतोष पैदा किया है. सरकार के खिलाफ लोगों के भीतर विरोध की चिंगारी धीरे-धीरे सुलग रही थी, जिसे उरूमकी हादसे ने पूरी तरह से भड़का दिया.
चीन में सड़कों पर उतरे लोग सिर्फ जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ नहीं बल्कि चीन सरकार के विरोध में खड़े हैं. ये लोग राष्ट्रपति शी जिनपिंग के गद्दी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. देश में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकने पर अमादा हैं.
लॉकडाउन विरोधी एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी
चीनी जनता में उबाल के प्रमुख कारणों में एक शंघाई में लॉकडाउन विरोधी एक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी है. शंघाई पुलिस ने शहर में लगे लॉकडाउन का विरोध कर रहे और इसके लिए एक स्थानीय अधिकारी के इस्तीफे की मांग कर रहे एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया. जी शियाओलॉन्ग नाम के एक्टिविस्ट को दो सितंबर को हिरासत में लिया गया था.
दरअसल शियाओलॉन्ग ने सत्तारूढ़ सीसीपी पार्टी के सचिव ली कियांग को लगातार याचिकाएं लिखी थीं, जिनमें उन पर आंख मूंदकर सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए उन्हें इस्तीफा देने को कहा था. बाद में एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी से लोगों में गुस्सा था और लोग उनकी रिहाई के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.
खाने की किल्लत बनी विरोध की वजह

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