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'चीन-पाकिस्तान से भी मदद मिले तो भारत को 
नहीं ठुकराना चाहिए'

'चीन-पाकिस्तान से भी मदद मिले तो भारत को नहीं ठुकराना चाहिए'

The Quint
Friday, April 30, 2021 05:52:12 PM UTC

india corona china Pakistan aid:'भारत को चीन-पाकिस्तान से भी आयी मदद को क्यों नहीं ठुकराना चाहिए विदेश नीति ,why india should not decline corona aid china pakistan foreign policy diplomacy

(यह पूर्व राजदूत,लेखक और पूर्व राज्यसभा सांसद पवन के. वर्मा के साथ हुई टेलिफोनिक इंटरव्यू का अंश है, जिसमें भारत के कोरोना संकट पर आती विदेशी सहायता के संदर्भ में बातचीत हो रही है. इंटरव्यू लिया है द क्विंट के असिस्टेंट एडिटर, Op-Ed इंदिरा बसु ने)द क्विंट:चीन और पाकिस्तान -वह दो देश जिनसे भारत का संघर्ष रहा है ,विशेषकर हाल के वर्षों में - ने भी आज अपनी मदद की पेशकश की है. भारत की इस पर क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए?पवन के. वर्मा: मेरा अपना विचार है कि पाकिस्तान ,जो कि खुद तेजी से फैलती महामारी से जूझ रहा है, इस स्थिति में नहीं है कि हमारी मदद कर सके. ना ही चीन अपनी मदद की पेशकश को लेकर वास्तविक है- लेकिन मैं एक जरूरी बात कहना चाहूंगा:जब आपका घर जल रहा हो तब आप पानी के किसी भी मदद को अस्वीकार नहीं करते हैं. हमें हर एक मदद का मूल्यांकन उसके गुण के आधार पर करना चाहिए .ऐसा नहीं है कि वर्तमान में हमारा चीन के साथ ठोस व्यापारिक संबंध नहीं है. बॉर्डर पर तनाव और चीन का भारत पर हावी होने की कोशिश के बावजूद भी वह हमारा मुख्य आर्थिक साझेदार है. इसलिए अगर चीन तत्काल मदद ,मेडिकल सप्लाई और वैक्सीन के कच्चे माल, की स्थिति में है तो हमें उसका स्वागत करना चाहिए. अभी हमें अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट होना चाहिए. हमारा लक्ष्य है कि हम देश में मौजूदा संकट को कम करें. लोग ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाई की कमी के कारण बड़ी तादाद में मर रहे हैं .हमें इस संकट को रोकना होगा और अपने लोगों की सहायता करनी होगी. उसके लिए कोई भी मदद उपयोगी है और उसका प्रयोग होना चाहिए. ' हमारी सरकार दूसरी लहर की क्रूरता के लिए तैयार नहीं थी'द क्विंट: जर्मनी और UK भी, जिनके साथ हमारे मजबूत संबंध हैं ,मदद के लिए सामने आए हैं .हमने उनकी तरफ पहले पहल क्यों नहीं की? यह माना जा रहा है कि हमने UK के प्राइवेट प्लेयर्स से मदद की पेशकश को भी ठुकरा दिया .पवन के. वर्मा: मुझे नहीं लगता हमारी सरकार दूसरी लहर के क्रूरता के लिए आंतरिक रूप से तैयार थी. इसलिए दूसरे देशों से सहायता के लिए हमारा प्रयास -जो कि जरूरी था- सुस्त,नजरअंदाज और अनुपस्थित रहा. अगर हमने देश में पहले से निर्धारित लक्ष्यों के हिसाब से आवश्यक संख्या में ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाया तब हम दूसरे देश के पास मदद मांगने क्यों जाते (क्योंकि हम 'फ...
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