
चलती ट्रेन में आग, खिड़की से कूदकर बचाई जान... पतालकोट एक्सप्रेस के 150 यात्रियों के लिए 'भगवान' बने यशपाल
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आगरा के भांडई रेलवे स्टेशन पर पातालकोट एक्सप्रेस की दो जनरल बोगियों में अचानक से आग लग गई. इस हादसे में 11 लोग झुलसे हैं. यात्रियों से खचाखच भरी दो बोगियों के अलावा यह आग और भी फैल सकती थी और एक बड़ा हादसा हो सकता था. लेकिन गेटनमैन की सूझबूझ से 150 यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई और एक बड़ा हादसा होने से टल गया.
25 अक्टूबर की तारीख... पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन पंजाब के फरीदकोट से मध्य प्रदेश के सियोनी जा रही थी. रोजाना की तरह ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी. तभी दोपहर 3 बजकर 37 मिनट पर अचानक से आगरा से 10 किलोमीटर दूर भांडई स्टेशन के पास ट्रेन की दो जनरल बोगियों में चीख-पुकार मच गई. कारण था आग. दरअसल, ट्रेन में अज्ञात कारणों से आग लग गई थी. ट्रेन को तुरंत रोका गया और यात्री अंदर से बाहर निकलने लगे. कुछ यात्रियों ने तो खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई.
हालांकि, इस हादसे में 11 लोग आग की चपेट में आने से झुलस गए. लेकिन उनकी जान बच गई. तुरंत घायल यात्रियों को अस्पताल पहुंचाया गया. वहीं, मौके पर पहुंचे रेल प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से ट्रेन के कोचों में लगी आग को बुझाने का प्रयास शुरू किया. तीन घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका.
आखिर आग लगी कैसे इस बात की अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. लेकिन जिस शख्स की वजह से यह बड़ा हादसा कम में ही टल गया वो कोई और नहीं बल्कि रेलवे गैटमैन है. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, फाटक 487 पर तैनात गेटमैन यशपाल सिंह ने ट्रेन से धुआं उठते देख लिया था. उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी. स्टेशन मास्टर ने सतर्कता दिखाते हुए ट्रेन के दोनों डिब्बों की विद्युत सप्लाई काट दी. दोनों कोच को फिर ट्रेन से अलग कर दिया गया. अगर समय पर गेटमैन धुआं उठने की सूचना नहीं देता तो शायद कोई बड़ी अनहोनी हो जाती. बताया जा रहा है कि उस समय उन दो बोगियों में 150 से ज्यादा यात्री सवार थे.
सेना से रिटार्यड यशपाल सिंह जो कि भारतीय रेलवे में गेटमैन हैं, उन्होंने बताया कि 3.35 मिनट पर पातालकोट ट्रेन भांडई स्टेशन पर पहुंची. उन्होंने ट्रेन के चौथे कोच से धुआं उठता देखा. यह जनरल बोगी थी. लेकिन ट्रेन में मौजूद किसी भी यात्री को इस बात की भनक नहीं लगी कि वहां क्या हो रहा है. उन्होंने बताया, ''मैंने धुआं देखते ही स्टेशन मास्टर हरिदास को इसकी सूचना दी. हरिदास ने फिर कंट्रोल रूम को इस बात की जानकारी दी. जिसके बाद ट्रेन नियंत्रक ने तुरंत ओएचई (ओवर हेड इक्विपमेंट) प्रभारी को अप और डाउन दिशा की सभी ट्रेनों की बिजली आपूर्ति बंद करने और ट्रेन को तुरंत रोकने का निर्देश दिया.''
3 बजकर 37 मिनट पर ट्रेन को रोका गया. तब तक आग तेजी से फैलने लगी. यात्री जान बचाने के लिए ट्रेन से बाहर निकलने लगे. बाहर निकलने में मुश्किल भी हो रही थी. लेकिन जान का सवाल था. इसलिए कुछ लोगों ने तो खिड़की से ही छलांग लगा दी. फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, RPF और SPART मौके पर पहुंचे.
यात्रियों के बाहर निकलते ही ट्रेन पर आग बुझाने का काम शुरू कर दिया गया. तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. 11 लोग हालांकि, इस हादसे में आग से झुलस गए. राहुल कुमार (18), मोहित (25), शिवम (18) मनोज कुमार (34), हरदयाल (59), मनीराम (45), रामेश्वर (29), गौरव (22), सिद्धार्थ (18) हितेश (17) और विकास (17) इस हादसे में घायल हो गए.

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