
घर से लापता हो गया था बेटा... परिजन तोड़ चुके थे उम्मीद, फिर अचानक लौट आईं खुशियां
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महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में भटकते मिले एक युवक को पुलिस और सामाजिक संस्था की कोशिशों से उसके परिवार से मिलवा दिया गया. रायगढ़ से लापता हुए संतोष को उसके घर तक पहुंचा दिया गया है. बेटे के घर आ जाने के बाद परिजन बेहद खुश हैं.
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में एक महीने तक लापता रहे मानसिक रूप से बीमार युवक को एक सामाजिक संस्था और पुलिस की मदद से उसके परिवार से मिला दिया गया. इस पहल ने एक परिवार को खुशियां दी हैं. परिजनों ने पुलिस के साथ ही सामाजिक संस्था का आभार जताया.
एजेंसी के अनुसार, पीड़ित युवक की पहचान संतोष सुधाकर जाधव के रूप में हुई है, जो रायगढ़ जिले के माणगांव से 13 दिसंबर को अचानक लापता हो गया था. परिवार उसकी तलाश कर रहा था, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. इसी दौरान वह सिंधुदुर्ग जिले के कंकावली के पास एक गांव में बदहवास हालत में भटकता हुआ मिला. स्थानीय लोगों ने उसे देखा तो पुलिस को सूचना दी.
पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल उसे अपने संरक्षण में लिया और फिर उसे संविता आश्रम भेजा गया, जो जीवन आनंद संस्था द्वारा संचालित एक पुनर्वास केंद्र है. संस्था के ट्रस्टी किसान चौरे के अनुसार, संतोष को वहां सुरक्षित आवास, भोजन, इलाज और मानसिक देखभाल दी गई. पुलिस ने उसकी पहचान और परिवार का पता लगाने के लिए जांच शुरू की.
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कंकावली पुलिस और संविता आश्रम की संयुक्त कोशिशों से आखिरकार संतोष के परिवार का पता चल गया. मुंबई से उसकी बहन पूनम जाधव कंकावली पहुंचीं और अपने भाई को अपने साथ घर ले गईं. पूनम जाधव ने कहा कि हमने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि संतोष कभी मिलेगा, लेकिन पुलिस और संविता आश्रम की वजह से मेरा भाई आज हमारे साथ है. मैं उनकी हमेशा आभारी रहूंगी.
संस्था के अनुसार, जुलाई 2025 से अब तक संविता आश्रम ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से भटके कई लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया है.

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