
गोल्ड की दीवानी क्यों दुनिया? डॉलर की दादागीरी को टक्कर या ट्रंप के 'टैरिफ बम' का डर!
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भारत दम भर सोना खरीद रहा है, चीन का भी यही हाल है, तुर्की और यूरोप के देश भी गोल्ड शॉपिंग पर निकले हुए हैं. लेकिन क्यों? क्या ये ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी से पैदा होने वाले खतरे को देखते हुए सेंट्रल बैंक भविष्य की तैयारी कर रहे हैं. या फिर सचमुच दुनिया डॉलर की दादागीरी को टक्कर देने की तैयारी कर रही है.
"सोना एक खजाना है, और जिसके पास यह है वह इस दुनिया में जो चाहे कर सकता है." पांच सौ साल पहले कही गई कोलंबस की ये बात आज भी सच साबित होती है. यही वजह है कि आज भी लोग गोल्ड को भरोसे के रूप में देखते हैं. विश्व की सरकारों का गोल्ड रिजर्व भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि सोना भरोसे का साथी, विश्वसनीय संपत्ति, और आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ सुरक्षा का प्रतीक रहा है.
पिछले साल अलग अलग देशों के सेंट्रल बैंकों ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा. आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल से दुनिया के केंद्रीय बैंक हर साल 1000 टन से ज्यादा सोना खरीद रहे हैं. 2024 में दुनिया के बैंकों ने 1045 टन सोना खरीदा.
साल 2024 में सोना खरीदने वाले देशों में नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड पहले नंबर पर रहा. दूसरे नंबर पर रहा भारत का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और तीसरे नंबर पर रहा सेंट्रल बैंक ऑफ तुर्की.
2023 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 1037 टन सोना खरीदा था.
इससे पिछली साल यानी कि 2022 में दुनिया के बैंकों ने रिकॉर्ड मात्रा सोना खरीदा था. इस साल केंद्रीय बैंकों ने 1136 टन सोना खरीदा था. ये 1950 के बाद अब तक सोने की सबसे ज्यादा खरीद थी.
RBI ने कितना सोना खरीदा?

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