
गाजा पट्टी के लोगों के पास भागने के लिए 48 घंटे, अगर असफल रहे तो क्या डिटेंशन सेंटर में डाल दिए जाएंगे?
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इजरायल हमास को खत्म करने के आखिरी चरण में है. इससे पहले वो गाजा के लोगों से जगह खाली करने की अपील कर चुका. चूंकि ये इलाका चारों ओर से घिरा हुआ है, लिहाजा इजरायली आर्मी ने एक अस्थाई रूट खोल दिया जहां से गाजावासी बाहर निकल सकें. इस सारी कोशिश के बीच एक डिटेंशन सेंटर सुर्खियों में हैं, जिसे इजरायली सेना चलाती है.
इजरायल ने बुधवार को एलान किया कि गाज़ा के लोगों को बाहर निकालने के लिए वो एक अस्थाई रूट खोल रहा है. इजरायली सेना अब जमीनी हमले तेज कर चुकी. इसमें आम लोगों का नुकसान न हो, इसके लिए रास्ता खोला जा रहा है. इस बीच स्दे तेइमान डिटेंशन कैंप की चर्चा हो रही है. ये वो जगह है, जिसकी तुलना दुनिया की सबसे खतरनाक जेलों से होती रही. रेगिस्तान में बने इस हिरासत कैंप में सैकड़ों गाजावासी रखे गए हैं.
जैसे-जैसे इजरायली सेना आगे बढ़ रही है, ये डर गहरा रहा है कि गाजा पट्टी के बचे हुए लोग इस डिटेंशन कैंप में न ठूंस दिए जाएं. वैसे तो इस कैंप के बारे में बहुत कम ही जानकारी मिलती है, लेकिन जितनी भी पब्लिक डोमेन में है, डराने के लिए काफी है.
स्दे तेइमान इजरायली सेना का हिरासत और पूछताछ केंद्र है. नेगेव रेगिस्तान में बने सेंटर में आधिकारिक तौर पर उन लोगों को रखा जाता है, जो इजरायली एक्शन के दौरान किसी भी वजह से संदिग्ध लगे. इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो अवैध रूट से भागते हुए पकड़े गए. सीक्रेसी बनाए रखने वाली इजरायली सेना इस कैंप पर बहुत कम बात करती है, लेकिन खबरें आती रहीं कि यहां कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है.
कई बार इस कैंप को अमेरिका की ग्वांतानामो बे जेल से जोड़कर देखा जाता रहा. दरअसल, ग्वांतानामो में कैदियों को अनिश्चित समय तक रखा जाता था. इस कैद के दौरान वे बेसिक सुविधाओं से दूर तो थे ही, साथ ही टॉर्चर भी सहते. मसलन, कैदियों को कई-कई दिनों तक सोने से रोका जाता. गलती होने पर उन्हें लंबे समय के लिए सॉलिटरी कन्फाइनमेंट दे देते.
मानवाधिकार संगठनों ने इसपर काफी हो-हल्ला किया. इसी साल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जेल को बंद करके एक नया डिटेंशन सेंटर बनाने की बात की, जो उसी तर्ज पर काम करेगा, यानी धुंधलके में.
इजरायल के डिटेंशन सेंटर की भी यही खासियत है कि वो खुफिया तरीके से काम करता है. एक बार अगर कोई इसके भीतर पहुंचा तो लंबे समय तक उसकी कोई खोज-खबर नहीं मिलती. कैदियों को जल्दी कोर्ट में नहीं लाया जाता. वकील और परिवार उनसे नहीं मिल पाते.

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अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का आज 25वां दिन है. एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की हलचल तेज हुई है, तो दूसरी तरफ सैन्य हमले भी थम नहीं रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के ऊर्जा और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 5 दिन हमला ना करने का दावा किया लेकिन अब IRGC ने दावा किया है कि ईरान के 2 ऊर्जा ठिकानों को फिर से निशाना बनाया गया. इस बीच इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और उसके बाद कहा कि ईरान और लेबनान पर हमले जारी रहेंगे. इजरायल लगातार लेबनान में हिज्बुल्ला के ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस हमलों के बीच ये युद्ध भीषण रूप लेता जा रहा है. जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बेहद मजबूत बातचीत हुई है और करीब करीब सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है. उन्होंने ये भी कहा है कि विटकॉफ और कुश्नर बातचीत कर रहे हैं. अगर इसी तरह बातचीत चली तो युद्ध खत्म हो सकता है. ट्रंप दावा कर रहे हैं कि मजबूत बातचीत रही लेकिन ईरान का कहना है कि कोई बातचीत नहीं हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि विटकॉफ और कुशनर किससे बातचीत कर रहे हैं तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हम उस व्यक्ति से बात कर रहे हैं, जिसे मैं सबसे अधिक सम्मानित और नेता मानता हूं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो नेता ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खुमेनेई हैं तो ट्रंप ने कहा कि नहीं- वो सुप्रीम लीडर नहीं है, हमें ये भी नहीं पता कि वो जीवित हैं या नहीं.

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