
गाजा के 2 शहरों में इजरायली सेना का भीषण हमला, स्कूल पर एयरस्ट्राइक, 20 लोगों की मौत
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Israel-Hamas War: गाजा के शेख राजवान और दीर अल बलाह शहर में इजरायली सेना ने जबरदस्त हवाई हमला किया है. इसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई है और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. इस हमले के बाद से लोग दहशत में हैं. चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल दिख रहा है.
ईरान और लेबनान में युद्ध के मोर्चे खोल चुका इजरायल गाजा में जबरदस्त हमले जारी रखे हुए हैं. रविवार तड़के गाजा के दो बड़े शहरों में इजरायली सेना ने भीषण हवाई हमला किया है. पहला हमला मध्य गाजा के दीर अल बलाह शहर में हुआ. यहां आईडीएफ ने अल अक्सा अस्पताल के आसापास टेंट शिविर में जबरदस्त हवाई हमला किया. इसमें चार फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं.
वहीं, दूसरा हमला उत्तरी गाजा के शेख राजवान में हुआ. आईडीएफ ने हमामा स्कूल को निशाना बनाया. इसमें 16 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 21 लोग घायल हुए हैं. आनन-फानन में सभी घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया. ये हमला इतना जबरदस्त था कि स्कूल और उसके परिसर का एक हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है. हर तरफ चीख पुकार मच गई. जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागते नजर आए.
एक नागरिक सुरक्षाकर्मी रामी दबाबिश ने कहा, "हमामा स्कूल पर बड़ा हमला किया गया है. वहां पहुंचने के बाद हमने अपना काम शुरू कर दिया. इस हमले में मारे गए लोगों के शवों को हटाया. इसके बाद स्कूल के एक कर्मचारी को इजरायली सेना की कॉल आई. इसमें बताया गया कि इस क्षेत्र को फिर से निशाना बनाया जाएगा. हम वहां से चले गए. इस क्षेत्र को फिर निशाना बनाया गया, जिससे मरने वालों की संख्या दोगुनी हो गई.''
इस बीच इजरायल में काम कर रही सिविस डिफेंस ने चेतावनी दी है कि उसके पास ईधन खत्म हो रहा है. कुछ ही देर में काम बंद हो जाएगा. लिहाजा एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों का इस्तेमाल वो नहीं कर पाएंगे. 7 अक्टूबर के बाद से गाज़ा में इज़रायली हमले लगातार जारी हैं. अब तक 10 महीने में करीब 40 हज़ार फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है. 23 लाख आबादी में ज़्यादातर लोग बेघर हैं. गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे हैं.
बताते चलें कि इजरायल इस वक्त चौतरफा घिरा हुआ है. वो एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रहा है. गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और इन सबके सबसे बड़े सहयोगी ईरान के साथ भी जंग का आगाज बहुत जल्द होने वाला है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इजरायल ने राजधानी तेहरान में हमास चीफ इस्माइल हानिया को मार गिराया है. हानिया ईरान के नए राष्ट्रपति के शपथ समारोह में गए हुए थे.

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत से ईरान बुरी तरह आहत है. इस हमले में लारिजानी का बेटा भी मारा गया है. ईरान ने अब अमेरिकी और इजरायली हमले के जवाब में कार्रवाई तेज करते हुए कई क्लस्टर बम गिराए है और तेल अवीव में भारी नुकसान पहुंचाया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि जंग यहां से अब और भीषण रूप ले लेगी.

ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग का आज 19वां दिन है. लेकिन ये जंग अब थमने का नाम नहीं ले रही है. दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले जारी है. इस बीच ईरान ने दुबई पर फिर हमला किया है. इस हमले का वीडियो भी सामने आया है. हमले के बाद दुबई के कई इलाकों में धमाकों की आवाज सुनाई दी. दुबई के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर तबाह किया.

ईरान और अमेरिका की जंग का आज 19वीं दिन है. इस बीच इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी की मौत के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिकी बेसों पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने मिसाइल हमलों का वीडियो भी जारी किया है. IRGC ने कहा कि हमले में मल्टी-वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों समेत कई और घातक मिसाइलें शामिल हैं.

अमेरिका ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है. अमेरिकी राष्पति ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उनके साथी देश (नाटो) इस लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं. इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है.

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां आक्रामक रुख अपनाया है, वहीं कई सहयोगी देश सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाकर कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन के ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर ट्रंप भड़क गए हैं.

इज़रायल ने दावा किया है कि ईरान की नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी का भी खात्मा कर दिया है. अली लारीजानी को ईरान का De Facto Leader भी कहा जाता था, जो असल में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश की सत्ता संभाल रहे थे. शुक्रवार को उन्हें आखिरी बार तेहरान के उस जुलूस में देखा गया था, जो फिलिस्तीन की आज़ादी के लिए निकाला जा रहा था. उस जुलूस में अली लारीजानी ने तेहरान की सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इज़रायल को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि ईरान के नेता छिपकर डरने वालों में से नहीं है और उसी दिन उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के लिए भी ये कहा था कि इस युद्ध में वो खुद को बचाकर रखें. उस वक्त ऐसा माना गया कि अली लारीजानी खुल्लम-खुल्ला राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और दावा है कि इसी के बाद इज़रायल'और अमेरिका दोनों ने मिलकर उनका डेथ वॉरंट लिख दिया.







