
क्या है UN की 'लिस्ट ऑफ शेम', जिसमें हमास और अलकायदा जैसे आतंकियों के बीच इजरायल का नाम, क्या होगा असर?
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यूनाइटेड नेशन्स हर साल लिस्ट ऑफ शेम जारी करता है. इसमें आतंकवादी संगठनों के बीच इजरायल को भी डाल दिया गया. ये पहली बार है, जब कोई लोकतांत्रिक देश इस सूची में आया. अब वो अलकायदा, बोको हराम और इस्लामिक स्टेट जैसे बेहद कट्टर टैरर गुटों के बीच खड़ा है. जानिए, क्या हैं इसके मायने.
इजरायल और फिलिस्तीन के आतंकी गुट हमास के बीच लगभग 9 महीनों से जंग चल रही है. इसकी शुरुआत हालांकि हमास के इजरायली हमले से हुई, लेकिन अब ये यहूदी देश भी खुलकर आक्रामक हो चुका. वो हमास के ठिकाने वाले फिलिस्तीन पर लगातार अटैक कर रहा है. इस दौरान यूनाइटेड नेशन्स ने हमास के साथ-साथ इजरायल को भी लिस्ट ऑफ शेम में डाल दिया, जिसमें सारे आतंकी संगठन या फिर आतंक प्रभावित देश हैं. लेकिन इससे क्या फर्क पड़ेगा? क्या ये लिस्ट किसी देश पर बैन लगा सकती है?
क्या कहती है लिस्ट के साथ जारी रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र महासचिव जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने 13 जून को जारी एनुअल रिपोर्ट के साथ-साथ ही लिस्ट ऑफ शेम में शामिल आतंकी गुटों के नाम सार्वजनिक किए. युद्ध और बच्चों पर हिंसा से जुड़ी इस लिस्ट में माना गया कि पिछले साल लड़ाइयों में बच्चों के खिलाफ हिंसा अपने एक्सट्रीम तक चली गई. हत्याओं और हथियारों की वजह से अपंगता में लगभग 35 फीसदी की बढ़त हुई. रिपोर्ट में फिलिस्तीन को बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा हिंसा वाला इलाका बताया गया, जिसके लिए कथित तौर पर इजरायल भी जिम्मेदार है. यूएन के मुताबिक, इस जंग में 36 हजार मौतें हुईं, जिसमें 8 हजार बच्चे थे.
किनका नाम होता है सूची में यूएन हर साल एक सूची बनाता है, जिसमें वे आतंकी संगठन या देश शामिल होते हैं, जहां लगातार युद्ध हो रहा हो, और बच्चों पर हिंसा हो रही हो. साल 1996 में बच्चों और हथियारबंद संघर्ष के लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेशन का बंदोबस्त किया गया. इसमें लड़ाई के दौरान बच्चों पर असर जांचने के लिए 6 अपराधों को गंभीरतम की श्रेणी में रखा गया. कोई भी गुट या देश, इनमें से 5 अपराध करे या इसका आरोप लगे, तो वो अपने-आप ही लिस्ट ऑफ शेम का हिस्सा बन जाता है.
कौन से छह अपराध हैं - आतंकी मंसूबों के लिए बच्चों को शील्ड बनाना या उनकी भर्तियां करना ताकि जासूसी करवाई जा सके, या लड़ाई में किसी भी तरह इस्तेमाल किया जा सके. - बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा युद्ध में काफी देखी जाती रही. ये भी गंभीरतम अपराध है. - स्कूलों और अस्पतालों पर हमला भी इस श्रेणी में आता है. बता दें कि हमास और इजरायल की लड़ाई में गाजा पट्टी के कई अस्पताल-स्कूल तबाह हो गए. - बच्चों का अपहरण करना ताकि दूसरी पार्टी को ब्लैकमेल किया जा सके, या कोई दूसरा मकसद पूरा हो सके. - बच्चों की हत्या करना या सशस्त्र संघर्ष के चलते उनका अपंग हो जाना. ये मामले भी फिलिस्तीन में खूब दिख रहे हैं. - बच्चों को मानवीय सहायता से दूर कर देना. फिलहाल जारी जंग में चूंकि घेराबंदी हुई पड़ी है, लिहाजा फिलिस्तीन के प्रभावित इलाके तक खाना या इलाज कम ही पहुंच पा रहा है.

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