
कॉमनवेल्थ से जुड़ना क्या US को कमजोर बना देगा, या यूरोप से दूरी से बीच नया दांव?
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डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की ऐसे वक्त पर तारीफ की, जब वो यूरोप और खासकर नाटो से दूरी बना रहा है. ये कयास भी लग रहे हैं कि अमेरिका 18वीं सदी के बाद पहली बार कॉमनवेल्थ देशों में शामिल हो सकता है. ये एक डिप्लोमेटिक रणनीति भी हो सकती है ताकि यूरोप में अमेरिका के लिए आए तनाव के तार कुछ ढीले पड़ें.
फरवरी में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर वाइट हाउस पहुंचे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को किंग चार्ल्स की चिट्ठी दी. हाल में एक और बात हुई. कथित तौर पर किंग चार्ल्स ने यूएस को कॉमनवेल्थ समूह में शामिल होने का न्यौता दिया. इसके बाद ट्रंप की चार्ल्स की तारीफ करती हुई कमेंट आई. अगर ये बात सच हुई तो यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है, जबकि ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की बात कर रहे हैं. साथ ही वे सैन्य समूह नाटो और यूनाइटेड नेशन्स दोनों से दूरी बना रहे हैं. तो कॉमनवेल्थ से जुड़ना क्या बदल सकता है?
कॉमनवेल्थ एक ऐसा संगठन है जिसमें 56 देश शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर देश कभी ब्रिटिश एंपायर का हिस्सा रहे, लेकिन अब आजाद हैं. इस गुट का मकसद सदस्य देशों के बीच दोस्ताना संबंध, व्यापार, लोकतंत्र और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है.
क्या ये देश ब्रिटेन के राजा को मानते हैं नहीं. पचास से ज्यादा देशों में से 15 ऐसे हैं, जो किंग को अपना स्टेट हेड मानते हैं. 5 मुल्कों में अपनी राजशाही है, वहीं 36 देशों में लोकतंत्र है. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ब्रिटिश राजशाही को मानते हैं, जबकि कॉमनवेल्थ में शामिल भारत का ब्रिटिश किंग से वैसा ताल्लुक नहीं.
क्या कॉमनवेल्थ से ब्रिटेन को सदस्यों पर कोई खास अधिकार मिलता है यह केवल एक सांस्कृतिक और आर्थिक संगठन है, न कि कोई राजनीतिक या सैन्य गठबंधन. यूके को कोई अलग अधिकार नहीं मिलता, बल्कि सारे देश अपनी तरह से काम करते हैं. बस वे कॉमनवेल्थ के नाम पर सिर्फ एक अंब्रेला का इस्तेमाल करते हैं. यहां तक कि जो देश किंग को मानते हैं, वे भी उन्हें प्रतीकात्मक राष्ट्राध्यक्ष ही मानते रहे. वहां की फॉरेन पॉलिसी से लेकर किसी भी फैसले पर ब्रिटेन का कोई असर नहीं रहता.
ब्रिटेन के अधीन रह चुका अमेरिका क्यों रहा संगठन से अलग 17वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश आबादी अमेरिका के कई राज्यों में बसने लगी, और जल्द ही वहां के पूर्वी हिस्से पर ब्रिटिशर्स ही रहने लगे. इन पर ब्रिटेन का सीधा कंट्रोल था, लेकिन अमेरिकी लोगों को ये शासन रास नहीं आ रहा था. टैक्स, व्यापार और आजादी के मुद्दों पर मतभेद बढ़ते चले गए और साल 1775 में अमेरिकी क्रांति शुरू हो गई. अस्सी के दशक में ब्रिटेन ने हार मान ली और अमेरिका आजाद हो गया. बाकी देशों की तरह यूएस ने कॉलोनी होने के कोई चिन्ह नहीं रखे, बल्कि ब्रिटेन से लगभग सारे नाते-रिश्ते खत्म कर लिए. वो एक अलग विचारधारा लेकर चला—रिपब्लिकनिज्म यानी लोगों की चुनी हुई सरकार. राजशाही से उसका कोई वास्ता नहीं रहा.

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